
काठमांडू, 10 अक्टूबर . नेपाली कांग्रेस के 15वें महाधिवेशन में गगन थापा भारी बहुमत के साथ दोबारा पार्टी अध्यक्ष चुने गए हैं. हालांकि, पार्टी के भीतर पूर्व Prime Minister शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व वाला विरोधी गुट दिसंबर में अपना अलग महाधिवेशन कराने की तैयारी कर रहा है.
पार्टी की केंद्रीय निर्वाचन समिति के अनुसार, जनवरी में अपने गुट द्वारा आयोजित विशेष महाधिवेशन के जरिए पहली बार अध्यक्ष बने गगन थापा ने इस चुनाव में 6,584 वोट हासिल किए. उनके प्रतिद्वंद्वी श्याम कृष्ण खड्गी को सिर्फ 375 वोट मिले. समिति ने बताया कि कुल 7,013 वोट डाले गए, जिनमें से 54 वोट अमान्य घोषित किए गए.
थापा की दोबारा जीत ऐसे समय में हुई है जब पार्टी मुश्किल दौर से गुजर रही है. पांच मार्च को हुए संसदीय चुनाव में नेपाली कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही थी. खुद गगन थापा भी अपनी सीट हार गए थे. वहीं, अपेक्षाकृत नई पार्टी राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (आरएसपी) 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और लगभग दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया.
थापा के सामने पार्टी में औपचारिक विभाजन की चुनौती भी है. शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व वाला गुट 7 से 9 दिसंबर के बीच अपना अलग 15वां महाधिवेशन आयोजित करने जा रहा है. देउबा गुट का दावा है कि वही असली नेपाली कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करता है.
दोनों गुटों की वैधता का मामला फिलहाल नेपाल के Supreme Court में विचाराधीन है. हालांकि, पांच मार्च के आम चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने थापा गुट को ही नेपाली कांग्रेस के रूप में मान्यता दी थी, जिसके आधार पर उसने चुनाव लड़ा.
50 वर्षीय गगन थापा 2006 के जनआंदोलन के दौरान छात्र नेता के रूप में चर्चित हुए थे. उस समय उन्होंने राजशाही के खिलाफ और गणतंत्र की स्थापना के समर्थन में कई प्रभावशाली भाषण दिए, जिन्हें युवाओं ने काफी पसंद किया. नेपाल छात्र संघ के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने उस दौर में राजतंत्र के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई, जब देश पर राजशाही का शासन था. उस समय नेपाली कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व देश को गणतंत्र बनाने की मांग पर ज्यादा मुखर नहीं था और संवैधानिक राजशाही तथा बहुदलीय लोकतंत्र की नीति का समर्थन करता था.
करीब दो दशक पहले राष्ट्रीय राजनीति में उभरने के बाद से गगन थापा पार्टी के भीतर और आम जनता के बीच लोकप्रिय नेता बने हुए हैं. 2006 के जनआंदोलन की सफलता के बाद पार्टी ने उन्हें 2008 के संविधान सभा चुनाव के लिए समानुपातिक प्रतिनिधित्व सूची में शामिल किया, जिसके जरिए वह पहली बार संविधान सभा पहुंचे.
पहली संविधान सभा नया संविधान बनाने में असफल रही, जिसके बाद 2013 में फिर चुनाव हुए. थापा ने काठमांडू-चार सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. उन्होंने 2017 और 2022 के चुनावों में भी यह सीट बरकरार रखी, जिससे राष्ट्रीय राजनीति में उनकी मजबूत पहचान बनी.
पार्टी के भीतर 2016 में 13वें महाधिवेशन के दौरान महासचिव पद के लिए उनका पहला चुनावी प्रयास सफल नहीं रहा था. लेकिन 2021 में 14वें महाधिवेशन में उन्होंने फिर उसी पद के लिए चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. 2022 के आम चुनाव के बाद थापा ने नेपाली कांग्रेस संसदीय दल के नेता पद के लिए शेर बहादुर देउबा को चुनौती दी थी, लेकिन हार गए थे.
पिछले साल सितंबर में हुए जेनरेशन-जेड आंदोलन के बाद थापा ने देउबा पर दबाव बढ़ाया. उन्होंने तत्कालीन महासचिव विश्व प्रकाश शर्मा के साथ मिलकर विशेष महाधिवेशन बुलाने की मांग की थी. उनका कहना था कि मार्च 2026 के चुनावों से पहले पार्टी में नेतृत्व और संगठनात्मक बदलाव जरूरी हैं.
अब गगन थापा पार्टी अध्यक्ष और विश्व प्रकाश शर्मा वरिष्ठ उपाध्यक्ष चुने गए हैं. दोनों नेताओं का कहना है कि वे युवा ऊर्जा और नई सोच के जरिए नेपाली कांग्रेस में बदलाव लाना चाहते हैं.
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एवाई/पीएम