नीट समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार के लिए एबीवीपी ने हाई पावर्ड टास्क फोर्स को भेजे सुझाव

New Delhi, 14 सितंबर . अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने देश की परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार को लेकर हाई पावर्ड टास्क फोर्स के अध्यक्ष नंदन नीलेकणि को अपने सुझाव भेजे हैं. एबीवीपी ने नीट सहित महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित, विश्वसनीय और विद्यार्थी हितैषी बनाने पर जोर दिया है.

परीक्षा सुधारों को लेकर एबीवीपी ने पुणे, नागपुर, Bhopal , दिल्ली, चंडीगढ़ और दक्षिण बिहार में राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस आयोजित कर विद्यार्थियों एवं विषय विशेषज्ञों के साथ चर्चा की. इन चर्चाओं के आधार पर एबीवीपी ने परीक्षा व्यवस्था में तत्काल, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक सुधारों को लेकर एक व्यापक सुझाव पत्र तैयार किया है.

एबीवीपी ने प्रमुख रूप से सुझाव दिया है कि महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं को दो चरणों में आयोजित किया जाए. पहले चरण में शॉर्टलिस्टिंग और दूसरे चरण में अंतिम चयन के लिए परीक्षा हो. इसके साथ ही एक ही परीक्षा पर अत्यधिक निर्भरता कम करने, नीट को वर्ष में दो बार आयोजित करने की व्यवहार्यता का अध्ययन कर बेहतर स्कोर को मान्यता देने, परीक्षा को कंप्यूटर आधारित बनाने, प्रश्नपत्र की सुरक्षा मजबूत करने, परीक्षा केंद्रों के लिए समान राष्ट्रीय मानक तय करने तथा अभ्यर्थी सत्यापन, डेटा सुरक्षा, उत्तर कुंजी, सामान्यीकरण, टाई-ब्रेकिंग और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का सुझाव दिया गया है.

तकनीकी या प्रशासनिक गड़बड़ी की स्थिति में स्पष्ट प्रोटोकॉल एवं आवश्यकता पड़ने पर पुनर्परीक्षा, स्वतंत्र सुरक्षा एवं प्रक्रिया ऑडिट, राष्ट्रीय प्रश्न बैंक, डिजिटल मूल्यांकन, एकीकृत परीक्षा प्रबंधन प्रणाली और केंद्रीय परीक्षा डैशबोर्ड की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है.

दीर्घकालिक स्तर पर पाठ्यक्रम, शिक्षण, मूल्यांकन और प्रवेश परीक्षाओं के बीच बेहतर समन्वय, कोचिंग पर निर्भरता कम करने के लिए संस्थागत शिक्षण को मजबूत करने, करियर काउंसलिंग तथा योग्यता-आधारित मूल्यांकन को बढ़ावा देने और बड़े सुधारों को पायलट, परीक्षण, समीक्षा और स्वतंत्र ऑडिट के बाद चरणबद्ध रूप से लागू करने का सुझाव दिया गया है.

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा, “परीक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें विद्यार्थी की मेहनत और क्षमता का सही मूल्यांकन हो और उसे परीक्षा से लेकर चयन तक अनावश्यक दबाव और अनिश्चितता का सामना न करना पड़े. हमारा सुझाव है कि महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं को दो चरणों में किया जाए. पहले चरण में शॉर्टलिस्टिंग हो और दूसरे चरण में अंतिम चयन के लिए परीक्षा हो. इससे चयन की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी और विद्यार्थियों को अपनी क्षमता के आधार पर आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिलेगा. एबीवीपी ने अपने सुझाव केवल तत्काल सुधारों तक सीमित नहीं रखे हैं, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में दीर्घकालिक बदलाव के लिए भी एक व्यापक रूपरेखा सामने रखी है.

डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि हमने अपने सुझाव हाई पावर्ड टास्क फोर्स को भेजे हैं. यदि समिति हमें चर्चा के लिए आमंत्रित करती है, तो हम इन सुझावों के आधार पर विस्तृत योजना और व्यावहारिक मॉडल के साथ अपनी बात रखेंगे. हमारा उद्देश्य ऐसी परीक्षा व्यवस्था बनाना है जिसमें हर विद्यार्थी को समान अवसर मिले, किसी तकनीकी या प्रशासनिक कमी की वजह से उसे परेशान न होना पड़े, और परीक्षा प्रणाली पर विद्यार्थियों एवं समाज का भरोसा मजबूत हो.

एएमटी/वीसी

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