
Mumbai , 7 सितंबर . भारतीय शेयर बाजार में लगातार आईटी शेयरों में बिकवाली देखी जा रही है. बीते एक वर्ष में निफ्टी आईटी इंडेक्स 13 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ मुख्य सूचकांकों में निफ्टी एफएमसीजी के बाद दूसरा सबसे बड़ा लूजर है.
इस दौरान टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में करीब 25 प्रतिशत, इन्फोसिस में 24 प्रतिशत, विप्रो में 28 प्रतिशत, एचसीएल टेक में करीब 10 प्रतिशत और एमफैसिस में लगभग 15 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है.
जानकारों के मुताबिक, आईटी शेयरों में गिरावट की प्रमुख वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के आने से टेक्नोलॉजी में बदलाव, कमजोर ग्रोथ, नतीजों का उम्मीद से कमजोर आना और निवेशकों का सेक्टर के भविष्य को लेकर चिंतित होना है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तेजी से इस बात को बदल रहा है कि बिजनेस टेक्नोलॉजी सर्विस का इस्तेमाल कैसे करते हैं. पारंपरिक रूप से, भारतीय आईटी कंपनियां कर्मचारियों की संख्या पर आधारित मॉडल, प्रोजेक्ट लागू करने, सॉफ्टवेयर मेंटेनेंस, टेस्टिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट के जरिए आय कमाती थीं.
एआई टूल्स तेजी और कुशलता के साथ इनमें से कई कामों को करने में ज्यादा सक्षम होते जा रहे हैं. नतीजतन, क्लाइंट्स बेहतर प्रोडक्टिविटी और कम लागत की उम्मीद कर रहे हैं.
हालांकि, एआई के आने से सटीकता और गैर-त्रुटिपूर्ण कार्य को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं, जो कि इन कंपनियों के लिए नए मौके भी पैदा कर रही है.
जून में देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टीसीएस की 31 वीं वार्षिक आम बैठक में कंपनी के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा कि टीसीएस अंतरिक परिचालन के लिए एआई एजेंट्स में निवेश कर रहा है. साथ ही , आने वाले समय में कंपनी के पास उसके कर्मचारियों के बराबर एआई एजेंट्स होंगे. साथ ही, उन्होंने एआई को एक बड़ा अवसर बताया.
बड़ी की अपेक्षा मध्य श्रेणी की आईटी कंपनियों का प्रदर्शन अच्छा बना हुआ है. बीते एक साल में ओरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज सॉफ्टवेयर ने 42 प्रतिशत, कोफोर्ज ने 16 प्रतिशत और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स ने 10 प्रतिशत का रिटर्न दिया है.
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एबीएस