
New Delhi, 5 अक्टूबर . दिल्ली हाईकोर्ट ने 2019 जामिया हिंसा और 2020 दिल्ली दंगों के दौरान कथित भड़काऊ भाषण से जुड़े मामले में दिल्ली Government में मंत्री परवेश वर्मा और कपिल मिश्रा को बड़ी राहत दी है. हाईकोर्ट ने Monday को उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी.
न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और मनोज जैन की खंडपीठ ने Monday को यह फैसला दिया. याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर परवेश वर्मा, कपिल मिश्रा और अन्य लोगों के खिलाफ कथित भड़काऊ भाषण के लिए First Information Report की मांग की थी.
शेख मुजतबा फारूक ने भाजपा नेताओं कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा और अभय वर्मा के भाषणों को लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई थी. आरोप है कि इन भाषणों ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़काए, जिनमें 50 से ज्यादा लोगों की मौत हुई.
अन्य याचिकाओं में, जिनमें कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) की नेता वृंदा करात और जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिकाएं शामिल हैं, दंगों में दिल्ली Police की भूमिका की अदालत की निगरानी में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) की ओर से जांच की मांग की गई थी.
Police पर दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ मार्च के दौरान जामिया मिलिया इस्लामिया में कथित ज्यादती के आरोप लगाए गए थे.
जामिया मामलों में छात्रों ने आरोप लगाया था कि विरोध प्रदर्शन के दौरान Police ने उनके साथ मारपीट की थी. एक याचिकाकर्ता ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) का भी रुख किया था. याचिकाओं में स्वतंत्र जांच और कुछ मामलों में जांच को दिल्ली Police से किसी बाहरी एजेंसी को सौंपने की मांग की गई थी.
उधर, ‘लॉयर्स वॉइस’ की ओर से दायर एक अन्य याचिका में राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मनीष सिसोदिया, असदुद्दीन ओवैसी सहित कई विपक्षी नेताओं और साथ ही एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की गई थी.
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डीसीएच/