
New Delhi, 24 सितंबर . Haryana की राजनीति में अगर किसी एक नाम को सबसे ज्यादा सम्मान से लिया जाता है, तो वह है ‘ताऊ’ देवी लाल. किसान परिवार से निकला यह शख्स देश के उप-Prime Minister के पद तक पहुंचा, लेकिन आखिरी सांस तक खुद को किसान और मजदूर का बेटा ही कहता रहा.
चौधरी देवी लाल का जन्म 25 सितंबर 1914 को सिरसा जिले के तेजाखेड़ा गांव में किसान परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम लेखराम था. 1926 में हरखी देवी के साथ उनका विवाह हुआ. देवी लाल उन गिने-चुने नेताओं में हैं जो आजादी से पहले और आजादी के बाद, दोनों दौर में सक्रिय रहे. उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया, जेल गए. आजादी के बाद जब 1952 में पहला विधानसभा चुनाव हुआ, तब Haryana पंजाब का हिस्सा था. देवी लाल पहली बार 1952 में ही विधायक बने. इसके बाद वह 1957 और 1962 में भी पंजाब विधानसभा के सदस्य चुने गए.
Haryana अलग राज्य बना तो देवी लाल यहां की राजनीति के केंद्र में आ गए. वह दो बार Haryana के Chief Minister रहे. पहली बार 21 जून 1977 से 28 जून 1979 तक और दूसरी बार 17 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 1989 तक. उनके दूसरे कार्यकाल में ही ‘न्याय युद्ध’ और बुजुर्गों के लिए 100 रुपए पेंशन जैसी योजनाओं ने उन्हें Haryana के घर-घर में लोकप्रिय बना दिया.
1989 का साल देवी लाल के Political जीवन का शिखर था. केंद्र में वीपी सिंह की अगुवाई में जनता दल की Government बनी. कहा जाता है कि संसदीय दल ने Prime Minister के लिए देवी लाल के नाम पर मुहर लगाई थी, लेकिन उन्होंने यह पद ठुकराकर वीपी सिंह को Prime Minister बना दिया. इसके बाद वे 19 अक्टूबर 1989 से 21 जून 1991 तक देश के उप-Prime Minister रहे, पहले वीपी सिंह और फिर चंद्रशेखर की Government में.
हालांकि कुछ Political विश्लेषकों का मानना है कि यह चंद्रशेखर को रोकने के लिए वीपी सिंह की एक रणनीति थी, जिसमें देवी लाल फंस गए थे. बाद में देवी लाल ने चंद्रशेखर गुट को समर्थन देकर उनकी Government में भी उप-Prime Minister का पद संभाला.
उप-Prime Minister बनने के बाद का दौर देवी लाल के लिए कठिन रहा. 1991, 1996 और 1998 में उन्होंने रोहतक Lok Sabha सीट से चुनाव लड़ा और तीनों बार अपने Political प्रतिद्वंद्वी भूपेंद्र सिंह हुड्डा से हार गए. 1972 में तो उन्होंने नाराज होकर आदमपुर और तोशाम दोनों सीटों से निर्दलीय चुनाव लड़ा और दोनों जगह हारे. आदमपुर में भजनलाल ने उन्हें करीब 10 हजार और तोशाम में बंसीलाल ने करीब 20 हजार वोटों से हराया था. अंतत: 1998 में वह राज्यसभा गए. राज्यसभा सदस्य रहते हुए ही 6 अप्रैल 2001 को उनका निधन हो गया.
देवी लाल के पांच बच्चे हुए, चार बेटे और एक बेटी. आज उनकी तीसरी और चौथी पीढ़ी भी Haryana की राजनीति में सक्रिय है.
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एससीएच/एबीएम