
चेन्नई, 27 सितंबर . तमिलनाडु में धान के उत्पादन में गिरावट और पड़ोसी राज्यों से आपूर्ति कम होने के कारण पिछले एक महीने में चावल की कई लोकप्रिय किस्मों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है. सबसे अधिक असर पोन्नी चावल की कीमतों पर पड़ा है, जो राज्य के अधिकांश घरों में मुख्य खाद्यान्न के रूप में इस्तेमाल होता है.
बाजार में पोन्नी चावल की कीमत 65 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 78 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई है. वहीं, मन्नाचनल्लूर पोन्नी 60 रुपये से बढ़कर 68 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है. प्रीमियम पोन्नी की कीमत 65 रुपये से बढ़कर 82 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है.
इसी तरह आईआर-20 चावल की कीमत भी पिछले महीने के 50 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 60 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है. सामान्य कच्चे चावल (रॉ राइस) का दाम भी 45 रुपये से बढ़कर कई दुकानों में 68 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है.
व्यापारियों के अनुसार पिछले 50 दिनों में चावल की कीमतों में तीन बार बदलाव किया गया है. उनका कहना है कि यदि दूसरे राज्यों से आपूर्ति कम रही और कुरुवई धान की फसल कमजोर रही तो कीमतों पर दबाव बना रह सकता है.
कावेरी डेल्टा क्षेत्र में कम बारिश और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने से धान की खेती प्रभावित हुई है. वहीं आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में भी धान की पैदावार घटने से तमिलनाडु की राइस मिलों तक पहुंचने वाले धान की मात्रा कम हो गई है.
राइस मिल मालिकों का कहना है कि दूसरे राज्यों से आने वाले धान की खरीद कीमत पिछले सीजन के 32 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर करीब 44 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है. उनका मानना है कि अप्रैल की कमजोर फसल के कारण धान की आवक घटी है. फिलहाल थोक बाजार में फाइन पोन्नी चावल करीब 75 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है.
तमिलनाडु में पोन्नी चावल की मांग अधिक है, लेकिन राज्य में इसकी खेती अपेक्षाकृत कम होती है. ऐसे में पड़ोसी राज्यों की फसल प्रभावित होने का सीधा असर इसकी कीमतों पर पड़ता है. हालांकि, मिल मालिकों को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में नई फसल की आवक बढ़ने से धान की आपूर्ति सुधरेगी और चावल की कीमतों में स्थिरता आ सकती है. दूसरी ओर खुदरा व्यापारी अभी भी कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका जता रहे हैं.
बढ़ती कीमतों के बीच व्यापारियों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों ने तमिलनाडु में उपभोक्ताओं की पसंद वाली महीन धान की किस्मों की खेती बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है, ताकि भविष्य में राज्य की आपूर्ति पड़ोसी राज्यों की फसल पर कम निर्भर रहे.
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डीएससी