
रांची, 13 सितंबर . Jharkhand के खेल निदेशालय में गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी सुनीता उरांव के झाड़ू-पोछा करने का मामला सामने आने के बाद नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य Government पर निशाना साधा है.
मरांडी ने कहा है कि थ्रोबॉल और वॉलीबॉल में Jharkhand के लिए दो गोल्ड सहित पांच मेडल जीतने वाली खिलाड़ी को उसकी योग्यता के अनुरूप सम्मानजनक रोजगार मिलना चाहिए. सुनीता उरांव पिछले कई वर्षों से रांची के मोरहाबादी स्थित खेल निदेशालय परिसर में झाड़ू-पोछा का काम कर रही हैं.
सुनीता उरांव के मुताबिक, उन्हें इसके लिए करीब 10 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं, लेकिन कई बार भुगतान में देरी होती है. वह करीब आठ घंटे काम करती हैं और मिलने वाला पैसा किराया तथा दूसरी जरूरतों में खर्च हो जाता है. सुनीता ने थ्रोबॉल और वॉलीबॉल में Jharkhand का प्रतिनिधित्व करते हुए दो गोल्ड, एक सिल्वर सहित पांच मेडल जीते हैं.
उन्होंने तमिलनाडु और Rajasthan में आयोजित प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लिया है. सुनीता के माता-पिता नहीं हैं और वह अपने भाई-भाभी के साथ रहती हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है. उनका एक भाई ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करता है. सुनीता का कहना है कि आर्थिक मजबूरी के कारण उसे यह काम करना पड़ रहा है.
सुनीता ने पिछले दिनों Chief Minister हेमंत सोरेन से अपनी योग्यता के अनुरूप नौकरी दिलाने की अपील करते हुए कहा कि वह अपनी मेहनत और खेल प्रतिभा के दम पर आगे बढ़ना चाहती हैं.
Jharkhand के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य Government खेल प्रतिभाओं के हित में काम करने के बजाय अन्य मदों में करोड़ों रुपये खर्च कर रही है.
उन्होंने Chief Minister से सवाल किया कि यदि Government के पास प्रचार-प्रसार और दूसरे कार्यों के लिए संसाधन हैं, तो सुनीता जैसी प्रतिभावान खिलाड़ी के सम्मानजनक भविष्य के लिए क्यों नहीं.
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एसएनसी/डीकेपी