Skip to content
Tuesday, 27 October 2026
Hindi Daily Kiran India, Rajasthan, business, sports, tech और अन्य श्रेणियों की ताज़ा हिन्दी ख़बरें।
BREAKING
कानून,राष्ट्रीय

जेपीएससी मेधा घोटाला: सीआईडी की चार्जशीट पर कोर्ट ने लिया संज्ञान, पूर्व अध्यक्ष समेत 12 पर चलेगा मुकदमा

जेपीएससी मेधा घोटाला: सीआईडी की चार्जशीट पर कोर्ट ने लिया संज्ञान, पूर्व अध्यक्ष समेत 12 पर चलेगा मुकदमा

रांची, 27 अक्टूबर . Jharkhand लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में हुए बहुचर्चित मेधा घोटाले में सीआईडी की ओर से दाखिल की गई 97 पन्नों की चार्जशीट पर सीआईडी के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने Tuesday को संज्ञान लिया है. अब राज्य Government की ओर से आवश्यक विभागीय अभियोजन स्वीकृति (सैंक्शन ऑर्डर) मिलने के बाद जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते और पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता सहित सभी 12 नामजद आरोपियों पर मुकदमा चलाया जाएगा. मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 नवंबर की तिथि निर्धारित की गई है.

अन्य आरोपियों में परीक्षा संचालन करने वाली निजी एजेंसी टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर व मुख्य मास्टरमाइंड अभय कुमार तिवारी, एजेंसी कर्मी मोहम्मद उस्मान और मोहम्मद एबाद के अलावा हेमंत कुमार वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह, संजय कुमार, सुमन सौरभ और अरविंद कुमार शामिल हैं. इन आरोपियों को पिछले जुलाई और अगस्त महीने में गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद से ये सभी न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं, और उनकी जमानत याचिकाएं भी खारिज हो चुकी हैं.

Tuesday को हुई सुनवाई के दौरान जेल में बंद सभी 12 आरोपियों को होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विशेष अदालत में पेश किया गया. अदालत को सौंपी गई चार्जशीट और केस डायरी में इस पूरे संगठित अपराध के कई सनसनीखेज और चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. जांच एजेंसी ने डिजिटल साक्ष्यों, फॉरेंसिक रिपोर्ट्स और कॉल डिटेल रिकॉर्ड के आधार पर यह दावा किया है कि जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में सफलता दिलाने के लिए 5 लाख रुपये और अंतिम चयन की गारंटी के लिए 10 से 25 लाख रुपये तक की भारी-भरकम रकम वसूली जा रही थी.

जांच में अवैध लेन-देन और घूसखोरी के तौर-तरीकों का पर्दाफाश करते हुए सीआईडी ने बताया कि तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते पैसों के इस खेल में ’10 रुपये के नोट के सीरियल नंबर’ को कोड के रूप में इस्तेमाल करते थे. ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को बिना टेंडर के उपकृत करने के बदले 2 करोड़ रुपये नकद और कुल बिलिंग का 10 प्रतिशत कमीशन तय किया गया था. जांच के दौरान ख्यांग्ते के मिजोरम (आइजोल) स्थित निजी आवास पर 2.5 लाख रुपये नकद पहुंचाने के हवाई यात्रा विवरण और मोबाइल लोकेशन के साक्ष्य भी हाथ लगे हैं.

इसके अलावा, उनके आवासीय कार्यालय और लैपटॉप बैग की तलाशी में 15 सफल अभ्यर्थियों की एक गोपनीय सूची और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर मुख्य परीक्षा के 8 मूल एडमिट कार्ड बरामद हुए, जिनमें से 10 अभ्यर्थियों का चयन भी कराया जा चुका था. जांच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम आधिकारिक रूप से प्रकाशित होने से पहले ही, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता ने परीक्षा एजेंसी टीडीपीएल के कर्मी मोहम्मद उस्मान के व्हाट्सएप पर गोपनीय जानकारियां और चयनित अभ्यर्थियों का पूरा डेटा लीक कर दिया था.

व्हाट्सएप चैट के तकनीकी विश्लेषण से यह खुलासा हुआ कि परिणाम से पहले ही 267 चयनित अभ्यर्थियों का संवेदनशील डेटा साझा किया जा चुका था, जिसमें सर्वाधिक 146 अभ्यर्थी बिहार के, 82 उत्तर प्रदेश के और 14 Haryana के रहने वाले थे. इसके अलावा मुख्य परीक्षा के प्रश्न, उत्तर और श्रेणीवार कट-ऑफ से जुड़ी जानकारियां भी पहले ही लीक कर दी गई थीं.

परीक्षा संचालन एजेंसी टीडीपीएल की भूमिका को लेकर चार्जशीट में बताया गया है कि मुख्य मास्टरमाइंड अभय कुमार तिवारी ने रांची के स्टेशन रोड स्थित एक पूरे होटल को 11 महीने की लीज पर ले रखा था, जिसका इस्तेमाल अयोग्य अभ्यर्थियों को ठहराने और ओएमआर शीट भरने की ‘सेटिंग’ के लिए एक गुप्त मुख्यालय के रूप में किया जाता था.

स्ट्रॉन्ग रूम से बिना सील की हुई मूल ओएमआर शीट और उसकी वीडियोग्राफी बरामद होने से यह साफ हो गया कि सुरक्षा व्यवस्था को जानबूझकर कमजोर किया गया था. गिरफ्तारी से ठीक पहले पूर्व अध्यक्ष ख्यांग्ते द्वारा अपने मोबाइल को फॉर्मेट करने और लैपटॉप को तोड़ने जैसी डिजिटल साक्ष्य नष्ट करने की कोशिशों का भी उल्लेख चार्जशीट में किया गया है.

–

एसएनसी/पीएम

Share