‘जिन्होंने अपने निजी सुख का त्याग किया, वही वीर साधक राष्ट्र के लिए धन्य माने जाते हैं’, पीएम मोदी ने साझा किया सुभाषित

New Delhi, 8 अक्टूबर . Prime Minister Narendra Modi ने Thursday को social media प्लेटफॉर्म एक्स पर वीर साधक को लेकर संदेश देते हुए सुभाषित साझा किया. इस सुभाषित के जरिए बताया गया कि निजी सुख का त्याग कर स्वराज्य की साधना में समर्पित साधक वास्तव में राष्ट्र के लिए धन्य माने जाते हैं.

Prime Minister मोदी की ओर से संस्कृत श्लोक, “भस्मीकृतस्वार्थसौख्यपरिचर्चितविग्रहाः. स्वराज्ययोगनिर्मग्ना धन्यास्ते वीरयोगिनः॥” साझा किया गया. इसका भावार्थ है कि जिन्होंने अपने निजी सुख का त्याग किया और अपने सम्पूर्ण अस्तित्व को स्वराज्य की साधना में समर्पित कर दिया, वही वीर साधक वास्तव में राष्ट्र के लिए धन्य माने जाते हैं.

पीएम मोदी की ओर से साझा किया गया यह श्लोक ‘सुभाषितम’ है. इस श्लोक का भावार्थ है कि जिन्होंने अपने निजी स्वार्थ और सुख-सुविधाओं को पूरी तरह से भस्म (नष्ट) कर दिया है और उस त्याग की भस्म को अपने शरीर पर धारण कर लिया है, जो केवल अपने देश की आजादी (स्वराज्य) की साधना में पूरी तरह डूबे हुए हैं, ऐसे वीर कर्मयोगी (देशभक्त) सचमुच धन्य हैं.”

यह श्लोक में किसी साधारण योगी की बात नहीं की गई है बल्कि ‘वीर योगी’ यानी देशभक्तों की बात की गई है. यानी वे वीर पुरुष (वीर योगी) धन्य हैं, जिन्होंने अपने निजी स्वार्थ और सुख-सुविधाओं को पूरी तरह से भस्म (त्याग) कर दिया है और अपना संपूर्ण अस्तित्व ‘स्वराज्य’ (स्वशासन या राष्ट्र) की सेवा के योग में समर्पित कर दिया है.

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एसडी/पीएम

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