जर्मनी: दक्षिणपंथी एएफडी से राज्य चुनाव में मिली करारी हार, चांसलर मर्ज ‘हैरान’

बर्लिन, 7 सितंबर . जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की सत्तारूढ़ क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) को सैक्सोनी-आनहाल्ट के राज्य चुनाव में मिली करारी हार ने उनकी Government और नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. चुनाव नतीजों ने दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया है, जबकि सीडीयू को सत्ता से बाहर होना पड़ा है.

चुनाव परिणाम के बाद Monday को प्रेस कॉन्फ्रेंस में मर्ज ने स्वीकार किया कि यह उनकी पार्टी की “वर्षों, बल्कि दशकों में सबसे गंभीर चुनावी हार” में से एक है. उन्होंने कहा कि नतीजे ने उन्हें और उनकी पार्टी को “गहराई से झकझोर दिया” है और Government अब इसे नजरअंदाज नहीं कर सकती.

मर्ज के सामने सबसे सीधा सवाल उनकी Political जिम्मेदारी को लेकर था. उनसे पूछा गया कि आखिर वह किस बिंदु पर यह स्वीकार करेंगे कि उनकी Political रणनीति विफल हो रही है और वह चांसलर के रूप में आगे सेवा करने की स्थिति में नहीं हैं.

चांसलर ने हालांकि पद छोड़ने की किसी संभावना के संकेत नहीं दिए. उन्होंने कहा, “वह इस बात पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं कि देश को फिर से साझा Political सफलता के रास्ते पर कैसे लाया जाए.” साथ ही उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हार मानना कोई विकल्प नहीं है.”

उन्होंने कहा कि वह ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो हर दिन अपनी भावनाएं सार्वजनिक रूप से जाहिर करते रहें, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में Government को आत्ममंथन करना होगा.

मर्ज ने अपनी Government के कामकाज का बचाव करते हुए कहा कि आने वाले समय में Government को यह साबित करना होगा कि पिछले साल चुना गया Political रास्ता सही था. उन्होंने माना कि जनता का भरोसा दोबारा हासिल करने के लिए Government को अपने फैसलों और उनके पीछे की वजहों को बेहतर ढंग से समझाना होगा.

उन्होंने कहा कि जर्मनी को प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने, नौकरशाही कम करने और आर्थिक विकास में बाधा डालने वाली अड़चनों को दूर करने के लिए और अधिक काम करने की जरूरत है.

हालांकि, Government में शामिल सीडीयू और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (एसपीडी) के बीच मतभेदों के सवाल पर मर्ज़ ने स्वीकार किया कि दोनों गठबंधन सहयोगियों को आपस में “बात करने की जरूरत” है.

सैक्सोनी-आनहाल्ट में लगभग 60 प्रतिशत मतदाताओं ने ऐसी पार्टियों को वोट दिया, जो देश की मौजूदा Political व्यवस्था को चुनौती देती हैं. मर्ज ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाने वाले दलों के प्रति इतना बड़ा समर्थन ऐसा परिणाम है, जिसे सामान्य चुनावी उतार-चढ़ाव मानकर आगे नहीं बढ़ा जा सकता.

उन्होंने कहा कि एएफडी के मजबूत प्रदर्शन के पीछे अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों तरह के कारण हैं. उनके मुताबिक मौजूदा स्थिति का दोबारा आकलन करना जरूरी है ताकि Government इस संकट का प्रभावी जवाब दे सके. लोकतांत्रिक Governmentों का काम समझौते के आधार पर चलता है और शायद Government को इस बात को जनता के सामने बेहतर तरीके से समझाने की जरूरत है.

एएफडी की जीत पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं का जिक्र करते हुए मर्ज ने रूस की ओर भी संकेत किया. उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम की खुशी “यहां से करीब 2,500 किलोमीटर पूर्व” में मनाई जा रही थी.

उन्होंने कहा कि यह आश्चर्यजनक नहीं है, क्योंकि कुछ ताकतों ने इस तरह के परिणाम को बढ़ावा देने और उसे संभव बनाने की कोशिश की. हालांकि उन्होंने किसी विशेष देश या संगठन का नाम सीधे नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा रूस की ओर माना जा रहा है.

सैक्सोनी-आनहाल्ट के निवर्तमान Chief Minister और सीडीयू नेता स्वेन शुल्जे ने हार स्वीकार करते हुए कहा कि उनकी पार्टी के पास अब राज्य में Government चलाने का जनादेश नहीं है.

उन्होंने कहा, “अब शासन का जनादेश एएफडी के पास है.” हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आगे क्या होगा, इसका फैसला निर्वाचित प्रतिनिधियों को करना है.

शुल्जे ने यह भी कहा कि उन्हें सीडीयू के किसी विधायक के एएफडी में शामिल होकर उसे बहुमत दिलाने की संभावना नजर नहीं आती. उन्होंने याद दिलाया कि एएफडी खुद पहले कह चुकी है कि वह दूसरी पार्टियों के साथ बातचीत नहीं करना चाहती.

जर्मनी के पूर्वी राज्य सैक्सोनी-आनहाल्ट के क्षेत्रीय चुनाव में धुर दक्षिणपंथी पार्टी एएफडी ने करीब 44% वोट हासिल करके ऐतिहासिक जीत दर्ज की है और इसकी ये जीत सत्ताधारी पार्टी के लिए किसी झटके से कम नहीं है.

केआर/

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