जम्मू-कश्मीर विधानसभा सत्र के लिए एनसी ने बनाई रणनीति, जनकल्याण के मुद्दों पर होगा फोकस

श्रीनगर, 20 सितंबर . जम्मू-कश्मीर विधानसभा के आगामी शरदकालीन सत्र से पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के विधायक दल की अहम बैठक Sunday को श्रीनगर के बैंक्वेट हॉल में पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला की अध्यक्षता में हुई. बैठक में पार्टी उपाध्यक्ष एवं Chief Minister उमर अब्दुल्ला भी शामिल हुए.

बैठक में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के छह विधायकों ने भी हिस्सा लिया. इस दौरान आगामी विधानसभा सत्र की रणनीति, सदन में प्रस्तावित विधायी कामकाज और जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया.

जम्मू-कश्मीर विधानसभा का शरदकालीन सत्र Monday से शुरू होना है. इसे देखते हुए बैठक में विधायकों ने सत्र के दौरान उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दों तथा पार्टी की प्राथमिकताओं पर चर्चा की. डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने विधायकों से आपसी समन्वय बनाए रखने और सदन में लोगों की चिंताओं एवं आकांक्षाओं को प्रभावी ढंग से उठाने का आह्वान किया. उन्होंने जनहित से जुड़े विषयों पर रचनात्मक भागीदारी और केंद्रित चर्चा की आवश्यकता पर भी जोर दिया.

बैठक में जनकल्याण, विकास और शासन-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी मंथन किया गया. साथ ही आगामी सत्र के दौरान प्राथमिकता के आधार पर उठाए जाने वाले विषयों पर चर्चा हुई. इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि विधानसभा की कार्यवाही के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक बेहतर समन्वय के साथ भाग लें और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रभावी तरीके से सदन के समक्ष रखें.

कुछ दिन पहले फारूक अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि उपGovernor के नेतृत्व वाला प्रशासन कश्मीरी पंडितों को धमकियां दिलवा रहा है, ताकि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा न मिल सके. अनंतनाग में पत्रकारों से बात करते हुए डॉ. अब्दुल्ला ने प्रशासन पर साफ तौर पर आरोप लगाया था कि वह जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा न देने के मकसद से कश्मीरी पंडितों को धमकियां दिलवा रहा है.

राज्य के दर्जे के बारे में पत्रकारों के सवाल का जवाब एक सवाल से देते हुए डॉ. अब्दुल्ला ने कहा, “धमकियां कौन दे रहा है? कश्मीरी पंडित अब यहां शायद ही रहते हैं. यहां तैनात सभी बड़े अधिकारी बाहर के हिंदू हैं. डीजी, डीआईजी, एसएसपी सभी हिंदू हैं, है ना? डिप्टी कमिश्नर भी हिंदू हैं. उन्हें धमकियां क्यों नहीं मिल रही हैं? सवाल यह है कि अगर हिंदुओं को धमकी दी जा रही है, तो उन्हें (सीनियर अधिकारियों को) धमकियां क्यों नहीं मिल रही हैं?” डॉ. अब्दुल्ला ने कहा कि ये धमकियां राज्य का दर्जा न देने की एक साजिश है.

एएमटी/वीसी

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