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Tuesday, 27 October 2026
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जम्मू-कश्मीर में कैबिनेट विस्तार से पहले सियासी हलचल तेज, मंगलवार सुबह 10:30 बजे होगा शपथ ग्रहण समारोह

जम्मू कश्मीर में कैबिनेट विस्तार से पहले सियासी हलचल तेज, मंगलवार सुबह 10:30 बजे होगा शपथ ग्रहण समारोह

जम्मू-कश्मीर में कैबिनेट विस्तार से पहले सियासी हलचल तेज, Tuesday  सुबह 10:30 बजे होगा शपथ ग्रहण समारोह

श्रीनगर, 26 अक्टूबर . जम्मू कश्मीर के उपGovernor मनोज सिन्हा ने मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार के बाद शपथ ग्रहण समारोह के लिए निमंत्रण जारी किए हैं. यह समारोह Tuesday सुबह 10:30 बजे लोक भवन में आयोजित किया जाएगा. इसके बाद से पूरे केंद्रशासित प्रदेश में इस बात को लेकर कयासों का दौर तेज हो गया है कि नए मंत्रिमंडल में किसे जगह मिलेगी और किसे बाहर किया जाएगा.

Chief Minister उमर अब्दुल्ला ने कहा कि शपथ लेने वाले मंत्रियों की सूची नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के साथ सलाह मशविरा करके पहले ही तय कर ली गई है. उन्होंने अपनी पार्टी के विधायकों को मंत्री पद पाने के लिए लॉबिंग न करने की सलाह दी और कहा कि वे कैबिनेट विस्तार में जगह पाने के लिए दरवाजे न खटखटाएं.

उमर अब्दुल्ला ने पत्रकारों से कहा, “कृपया मुझे वॉट्सऐप मैसेज न भेजें. मुझे लंबे-लंबे वॉट्सऐप मैसेज मिल रहे हैं, जिनमें बायो-डेटा और लंबी-लंबी कहानियां होती हैं, जैसे कि मैं उन्हें जानता ही नहीं. कृपया शपथ ग्रहण समारोह तक धैर्य रखें. सबको पता चल जाएगा कि उनकी किस्मत में क्या है.”

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 90 सदस्य हैं और ‘पुनर्गठन अधिनियम 2019’ के अनुसार, Chief Minister सहित विधानसभा की कुल संख्या के केवल 10 प्रतिशत सदस्य ही कैबिनेट का हिस्सा बन सकते हैं.

इस समय Chief Minister सहित कैबिनेट में छह सदस्य हैं. इसलिए उमर तीन और मंत्रियों को शामिल कर सकते हैं, बशर्ते वह नए चेहरों को जगह देने के लिए मौजूदा मंत्रियों में से किसी को हटाना न चाहें.

हालांकि Chief Minister और एनसी अध्यक्ष को अंतिम सूची की जानकारी है, लेकिन पार्टी के भीतर इस बात को लेकर काफी अटकलें लगाई जा रही हैं कि किसे मंत्री पद मिलेगा. बताया जा रहा है कि पार्टी आलाकमान ने साफ कर दिया है कि पहली बार विधायक बने नेताओं को कैबिनेट में शामिल नहीं किया जाएगा, जिससे अधिकांश विधायकों के मंत्री बनने की संभावना खत्म हो गई है.

कांग्रेस, जिसके पास छह विधायक हैं, एनसी के नेतृत्व वाली Government को समर्थन दे रही है. उमर द्वारा कैबिनेट में शामिल होने के प्रस्ताव के बावजूद जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जेकेपीसीसी) के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने दोहराया कि उनकी पार्टी Government को बाहर से समर्थन देना जारी रखेगी.

कांग्रेस का कहना है कि जब तक जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस नहीं मिल जाता, तब तक वह कैबिनेट से बाहर ही रहेगी.

मंत्री पद की उम्मीद रखने वाले पहली बार के विधायकों को अब किसी और मौके का इंतजार करना होगा. उनकी संभावनाएं उमर अब्दुल्ला के अगले कैबिनेट फेरबदल पर टिकी हैं. पूरी संभावना है कि Tuesday को हुआ कैबिनेट फेरबदल/विस्तार 2029 तक का आखिरी फेरबदल होगा, जब जम्मू-कश्मीर में अगले विधानसभा चुनाव होने हैं.

उमर ने अपने विधायकों के बीच किसी भी तरह की ‘बगावत’ की संभावना को खारिज कर दिया है. इसके अलावा, अतीत में नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) छोड़कर जाने वालों के अनुभवों को देखते हुए सत्ताधारी पार्टी के किसी विधायक के जम्मू-कश्मीर में कहीं और बेहतर मौके तलाशने की संभावना न के बराबर है.

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली Government द्वारा किए गए वादों को पूरा न कर पाने के कारण जनता में नाराजगी बढ़ती दिख रही है. अब यह देखना बाकी है कि क्या उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नई कैबिनेट लोगों की उम्मीदों पर खरी उतर पाती है और Government के कामकाज में सुधार ला पाती है या नहीं.

हालांकि, उमर अब्दुल्ला का यह तर्क कि ‘राज्य का दर्जा’ न होने की वजह से उनकी Government का कामकाज सीमित रहा है, जनता की बढ़ती नाराजगी के बीच शायद ही लोगों को रास आए. एनसी के लिए संदेश बिल्कुल साफ है कि या तो लोगों की उम्मीदों को पूरा करें, वरना उनका भरोसा खोने का जोखिम उठाएं. जम्मू-कश्मीर में पार्टी के Political भविष्य के लिए ‘काम करके दिखाओ या खत्म हो जाओ’ वाली स्थिति ही सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है.

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एससीएच/वीसी

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