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Sunday, 1 November 2026
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जम्मू-कश्मीर के बडगाम में ढेर आतंकी की पहचान एलईटी दहशतगर्द के तौर पर हुई

जम्मू-कश्मीर के बडगाम में ढेर आतंकी की पहचान एलईटी दहशतगर्द के तौर पर हुई

श्रीनगर, 5 सितंबर . जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में Friday को संयुक्त बलों के ‘ऑपरेशन अशदार’ में मारे गए आतंकवादी की पहचान Pakistanी नागरिक और लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के सदस्य के तौर पर की गई है.

जम्मू-कश्मीर Police ने Saturday को बताया कि बडगाम में ‘ऑपरेशन अशदार’ के दौरान मारे गए आतंकवादी की पहचान Pakistan के रहने वाले यासिर के तौर पर हुई है.

सुरक्षा बलों के ऑपरेशन में मारे गए आतंकवादी की पहचान की पुष्टि करते हुए जम्मू-कश्मीर Police ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “आप भाग तो सकते हैं, लेकिन छिप नहीं सकते.”

यह पहचान उस घटना के एक दिन बाद हुई है, जब सुरक्षा बलों ने बडगाम के अशदार गली इलाके में एक जॉइंट ऑपरेशन के दौरान एक आतंकवादी को मार गिराया था. अधिकारियों ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान मारे गए आतंकवादी के पास से एके-सीरीज की राइफल और युद्ध में इस्तेमाल होने वाला अन्य सामान भी बरामद किया गया.

यह ऑपरेशन Thursday को तब शुरू हुआ जब पैरा-कमांडो की एक पेट्रोलिंग टीम की आतंकवादियों के साथ गोलीबारी हुई. उन्हें वहां आतंकवादियों के एक ग्रुप की मौजूदगी के बारे में खास खुफिया जानकारी मिली थी.

राष्ट्रीय राइफल्स और जम्मू-कश्मीर Police के जवान भी इस ऑपरेशन में शामिल हुए और यह पक्का किया कि घने जंगल वाले इलाके में अंधेरा होने के बावजूद छिपा हुआ आतंकवादी भाग न पाए.

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद शुरू होने के बाद से पिछले 36 से ज्यादा वर्षों में बडगाम जिले में कई एनकाउंटर हुए हैं.

सबसे लंबा ऑपरेशन 1995 में भारतीय सेना ने चलाया था, जब Pakistan का आतंकवादी कमांडर मस्त गुल आतंकवादियों के एक ग्रुप के साथ चरार-ए-शरीफ शहर में घुस गया था और उसने शेख नूरुद्दीन वली की सबसे पवित्र सूफी दरगाह को घेर लिया था.

आम नागरिकों की मौत और सूफी दरगाह को नुकसान से बचाने के लिए भारतीय सेना ने शहर पर हमला नहीं किया. यह गतिरोध 66 दिनों तक चला, जब मस्त गुल ने दरगाह में आग लगा दी, जो तेजी से घनी आबादी वाले शहर में फैल गई.

सेना ने तुरंत जम्मू-कश्मीर Police, पैरामिलिट्री फोर्स और सिविल एडमिनिस्ट्रेशन के साथ मिलकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया. मस्त गुल शहर से भागने में कामयाब रहा और Pakistan चला गया. चरार-ए-शरीफ ऑपरेशन में कुल 20 आतंकवादी और चार आम नागरिक मारे गए थे. जबकि, सेना के दो जवान शहीद हुए थे.

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डीके/एबीएम

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