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Sunday, 1 November 2026
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जम्मू-कश्मीर के बडगाम के युसमर्ग इलाके में आतंकवादी घिरे, सुरक्षा ऑपरेशन जारी

जम्मू-कश्मीर के बडगाम के युसमर्ग इलाके में आतंकवादी घिरे, सुरक्षा ऑपरेशन जारी

श्रीनगर, 3 सितंबर . Thursday को जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिलने के बाद, सेना के पैरा कमांडो और राष्ट्रीय राइफल्स ने एक सीएएसओ (घेराबंदी और तलाशी अभियान) के दौरान आतंकवादियों के एक समूह को घेर लिया.

उच्च पदस्थ सूत्रों ने को बताया कि बडगाम के युसमर्ग के ऊंचे पहाड़ी इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में खास जानकारी मिलने के बाद, युसमर्ग के ऊंचे इलाकों में गश्त कर रहे 10 पैरा कमांडो का छिपे हुए आतंकवादियों से आमना-सामना हुआ.

एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा कि 53 राष्ट्रीय राइफल्स के जवान मौके पर पहुंच गए हैं और घेराबंदी को और मजबूत कर दिया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आतंकवादी अंधेरे का फायदा उठाकर भाग न सकें.

सूत्र ने बताया कि यह इलाका बडगाम के खानसाहिब Police स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आता है और खबर है कि घेराबंदी के अंदर दो आतंकवादी फंसे हुए हैं.

घेराबंदी को मजबूत करने के लिए Police और सीआरपीएफ की अतिरिक्त टुकड़ियां भी मौके पर पहुंच गई हैं.

बडगाम जिले में पहले भी बड़े आतंकवाद-विरोधी अभियान चलाए जा चुके हैं, जिनमें जनवरी 2023 में चरार-ए-शरीफ (जिनपंचाल/हपतनार) और रेडबुग (मगाम) इलाके में चलाए गए अभियान शामिल हैं, जिनमें एक संक्षिप्त मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के दो आतंकवादी मारे गए थे.

जनवरी 2022 में, जोलवा चाडूरा गांव में रात भर चली मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के तीन आतंकवादी मारे गए.

अक्टूबर 2020 में, चाडूरा और नौगाम के बाहरी इलाकों में हुई मुठभेड़ों में आतंकवादी मारे गए.

सबसे बड़ा ऑपरेशन 1995 में बडगाम के चरार-ए-शरीफ कस्बे में चलाया गया था. इस ऑपरेशन के दौरान 66 दिनों तक सैन्य गतिरोध बना रहा, क्योंकि Pakistanी आतंकवादी मस्त गुल ने जम्मू-कश्मीर की ऐतिहासिक सूफी दरगाह की घेराबंदी कर ली थी.

फरवरी और मार्च 1995 में, मस्त गुल और हथियारों से लैस आतंकवादियों के एक समूह ने कस्बे पर कब्जा कर लिया और शेख नूर-उद-दीन नूरानी की 14वीं सदी की दरगाह में डेरा डाल लिया.

संयुक्त सुरक्षा बलों ने कस्बे को घेर लिया ताकि उनकी सप्लाई रोकी जा सके और उन्हें आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया जा सके.

सेना ने पवित्र दरगाह की सुरक्षा और आम नागरिकों की मौत को रोकने के लिए सीधे हमले से परहेज किया.

आतंकवादियों ने सैनिकों को रोकने के लिए सड़कों पर विस्फोटक उपकरण और बारूदी सुरंगें (लैंडमाइन) बिछा दी थीं.

यह तनावपूर्ण गतिरोध दो महीने से भी ज्यादा समय तक चला. 11 मई 1995 की रात को भीषण आग लग गई, जिसमें दरगाह और कस्बे के सैकड़ों लकड़ी के घर जलकर खाक हो गए. घिरे हुए आतंकवादियों ने ही आग लगाई थी. इसी अफरातफरी का फायदा उठाकर मस्त गुल भागने में कामयाब रहा और Pakistan लौट गया.

इस लड़ाई में लगभग 20 आतंकवादी, दो सैनिक और पांच नागरिक मारे गए.

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एमएस/

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