चुनाव आयोग के अंदरूनी विवाद पर सियासत तेज, कांग्रेस और झामुमो ने साधा निशाना

New Delhi, 24 सितंबर . चुनाव आयोग में दो चुनाव आयुक्तों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताए जाने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है. कांग्रेस और झामुमो समेत कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने इस मुद्दे पर भाजपा और चुनाव आयोग दोनों को घेरा. उन्होंने कहा, “आरोप लगे हैं चुनाव आयोग पर और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं भाजपा के प्रवक्ता. यह लोकतंत्र लूट है. खुद चुनाव आयोग केसुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी कह रहे हैं कि 10 महीने में 17 बार गड़बड़ी की गई है.”

बता दें कि चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और आयोग के कुछ फैसलों पर लिखित रूप में कड़ी आपत्ति जताई है.

झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडेय ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त पर एकतरफा फैसला लेने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “तीन आयुक्तों द्वारा गठित कमेटी के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ने एकतरफा फैसला लिया, जो अनुचित है. अब मुख्य चुनाव आयुक्त पूरी तरह से एक्सपोज हो गए हैं. चुनाव आयोग पर शुरू से ही आरोप लगते आए हैं.” उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने जो कुछ भी किया है, वह किसी एक विशेष पार्टी को लाभ पहुंचाने के लिए किया है.

श्रीनगर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक अब्दुल मजीद लारमी ने चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर चल रहे विवाद पर कहा कि यह एक साजिश है. उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह एक साजिश है. जिस तरह से एसआईआर के नाम पर लोगों को वोटर लिस्ट से हटाया जा रहा है, मैं आज सुबह पढ़ रहा था कि दिल्ली में अरविंद केजरीवाल, एलके आडवाणी और कई अन्य लोगों के नाम भी वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे. वही चीज यहां भी हो रही है. अगर हम बंगाल या बिहार की बात करें तो उन्होंने वहां भी यही खेल खेला था. वे हमेशा हर जगह यही खेल खेलने की कोशिश करते हैं और पूरे India पर कब्जा करना चाहते हैं. ऐसे में तो हर जगह भाजपा की Government होगी.”

विपक्ष का कहना है कि एसआईआर के नाम पर वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया में गड़बड़ी हो रही है और इसका मकसद एक खास पार्टी को फायदा पहुंचाना है.

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वीकेयू/पीएम

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