गोवा में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ठगी का खुलासा, पीएमएलए के तहत दो आरोपी गिरफ्तार

पणजी, 25 अगस्त . Enforcement Directorate (ईडी) ने फर्जी ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर लोगों को ठगने और ठगी के पैसे को विदेशी मुद्रा में बदलने वाले बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है. एजेंसी ने इस मामले में दो लोगों को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया है.

आरोपियों की पहचान फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुइन सैयद के रूप में हुई है. दोनों को Sunday को गिरफ्तार किया गया था और Monday को गोवा की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 29 अगस्त तक पांच दिन की कस्टडी में भेज दिया गया है. यह कार्रवाई उत्तर गोवा की एक महिला की शिकायत के बाद की गई.

दरअसल, नॉर्थ गोवा साइबर क्राइम Police स्टेशन में दर्ज First Information Report के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की. एक स्थानीय महिला को ठगों ने 21 मई से 2 जून के बीच लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा और ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर उसे ‘सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट’ में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया. महिला को 2.60 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ.

जांच में पता चला कि पैसा एक संगठित नेटवर्क में गया, जो साइबर ठगी के पैसे को आरबीआई लाइसेंस वाले मनी चेंजर के जरिए नकद और विदेशी मुद्रा में बदलता था.

पीड़िता का पैसा कुछ ही घंटों में बंद पड़े और नए खोले गए बैंक खातों की पहली परत से होते हुए 400 से ज्यादा खातों में बांट दिया गया. इसके लिए ट्रांसफर, कैश निकासी, सेल्फ चेक और पेमेंट गेटवे का इस्तेमाल किया गया.

ईडी ने बताया कि जांच में ट्रेडिंग, ट्रैवल और फॉरेन एक्सचेंज कंपनियों का आपस में जुड़ा नेटवर्क मिला, जिसने 27,850 करोड़ रुपए से ज्यादा का बैंक लेनदेन किया था. इस नेटवर्क ने 2,904 करोड़ रुपए नकद जमा किए, जिसमें से 584.70 करोड़ रुपए 61,448 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए बल्क नोट एक्सेप्टेंस मशीनों से जमा किए गए.

इन फर्जी कंपनियों के बैंक खातों का लिंक 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज 163 First Information Report और 330 शिकायतों से जुड़ा है, जिनमें कुल 417.49 करोड़ रुपए की ठगी हुई है. 101 शिकायतों में एक ही पीड़ित का पैसा एक ही ग्रुप की दो या ज्यादा कंपनियों में एक ही फ्रॉड के दौरान भेजा गया, जिससे साफ है कि ये खाते अलग-अलग बिजनेस की तरह नहीं बल्कि एक साझा पूल की तरह काम कर रहे थे.

गिरोह ने सिंगल रूम में रहने वाले ड्राइवरों और कर्मचारियों के नाम पर कंपनियां बनाई और उन्हें डमी डायरेक्टर बनाया जबकि पूरा ऑपरेशन बाहर से कंट्रोल किया जाता था.

ईडी ने 17 जुलाई और 21 अगस्त को Mumbai और गोवा में 20 जगहों पर छापेमारी की, जिसमें 3.25 करोड़ रुपए नकद बरामद हुए और 30 करोड़ से ज्यादा का बैंक बैलेंस फ्रीज किया गया. एजेंसी ने डिजिटल डिवाइस, बही-खाते और रिकॉर्ड भी जब्त किए हैं, जिनकी जांच जारी है.

वीकेयू/पीएम

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