
गांधीनगर, 17 सितंबर . Gujarat Police के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीसीओई) ने एक साइबर क्राइम नेटवर्क के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है. इन पर 3.76 करोड़ रुपए के ‘डिजिटल अरेस्ट’ फ्रॉड में पैसे का हेरफेर करने में मदद करने का आरोप है और उनके बैंक अकाउंट 13 राज्यों में दर्ज 29 शिकायतों से जुड़े पाए गए हैं.
सीआईडी साइबर क्राइम सेल Police स्टेशन में दर्ज First Information Report की तकनीकी निगरानी और फील्ड जांच के बाद तीन आरोपियों को Rajasthan और चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया गया.
Police के अनुसार, तीनों आरोपियों को लगभग 83.11 लाख रुपए मिले थे और वे कथित तौर पर साइबर धोखाधड़ी से कमाए गए पैसे के लेन-देन में मदद करने के लिए कमीशन पर काम कर रहे थे.
चंडीगढ़ से गिरफ्तार आरोपी कथित तौर पर अपने मोबाइल फोन पर एप्लिकेशन का इस्तेमाल करके यूएसडीटी ट्रांजैक्शन करता था और क्रिप्टोकरेंसी को साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क के सदस्यों को ट्रांसफर करता था.
गिरोह कथित तौर पर बदले में कैश भेजता था, जो उसके अपने और दूसरे बैंक खातों के जरिए मिलता था. Police ने बताया कि Gujarat और दूसरे राज्यों में दर्ज 29 साइबर अपराध की शिकायतें इन ट्रांजैक्शन से जुड़ी थीं, जिनमें लगभग 13.11 लाख रुपए शामिल थे.
Rajasthan से गिरफ्तार दो आरोपियों ने कथित तौर पर एक पार्टनरशिप फर्म के नाम पर बैंक खाता खोला और कमीशन कमाने के इरादे से डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी से कमाए गए लगभग 70 लाख रुपए उस खाते में जमा किए.
उन्होंने कथित तौर पर बाद में पैसे ट्रांसफर कर दिए. आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच के दौरान Police को सात बैंक खातों की जानकारी मिली.
Police ने कहा, “नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर जांच से पता चला कि इन खातों का इस्तेमाल करके लगभग 83.11 लाख रुपए से जुड़े 29 से ज्यादा साइबर अपराध किए गए थे.”
इन खातों से जुड़ी शिकायतों में Gujarat में एक, Maharashtra में दो, कर्नाटक में सात, तमिलनाडु में तीन, Rajasthan में एक, उत्तर प्रदेश में एक, दिल्ली में एक, Madhya Pradesh में एक, पश्चिम बंगाल में तीन, आंध्र प्रदेश में दो, तेलंगाना में एक, Jharkhand में दो और Odisha में एक शिकायत शामिल है.
जांच में Police द्वारा बताए गए एक ‘नए तरीके’ का भी पता चला, जिसका इस्तेमाल नेटवर्क के फरार सदस्यों ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए शिकायतकर्ता से लिए गए 3.76 करोड़ रुपए को इधर-उधर करने के लिए किया था.
Police के अनुसार, आरोपी सबसे पहले उन लोगों को निशाना बनाते थे, जो ऑनलाइन लोन लेना चाहते थे. वे कथित तौर पर ऐसे लोगों से कहते थे कि वे नियो फाइनेंस नाम की फाइनेंस कंपनी से लोन ले सकते हैं और उनसे जरूरी दस्तावेज जमा करने को कहते थे.
इसके बाद पीड़ितों से कथित तौर पर प्ले स्टोर से पुशबुलेटल एप्लिकेशन डाउनलोड करवाया जाता था और उसे एक्टिवेट करने के लिए एक आईडी और पासवर्ड दिया जाता था. Police ने बताया कि इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर पीड़ितों के मोबाइल फोन का एक्सेस हासिल किया और ‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी से मिले पैसे को अपने बैंक खातों में मंगवाया.
इसके बाद इस पैसे को बल्क ट्रांजैक्शन के जरिए दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया. इस तरह नेटवर्क ने धोखाधड़ी से मिले पैसे को उन लोगों के खातों का इस्तेमाल करके दूसरी जगह भेज दिया, जिन्हें लगता था कि वे लोन के लिए अप्लाई कर रहे हैं.
गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों की पहचान Rajasthan के अजमेर जिले के रहने वाले गोपाल राम, अजमेर के ही रहने वाले नेकदीन कथत और Haryana के जींद के रहने वाले दीपक के तौर पर हुई है.
Police ने बताया कि आरोपियों ने कमीशन के बदले साइबर धोखाधड़ी से मिले पैसे को ट्रांसफर करने के लिए कथित तौर पर अपने नाम पर खुले बैंक खातों का इस्तेमाल किया.
नेटवर्क के एक और हिस्से में धोखाधड़ी से मिले पैसे को कथित तौर पर बैंक खातों में लिया गया, यूएसडीटी में बदला गया और दूसरे सदस्यों को दिया गया.
जांच के दौरान जिन बैंक खातों की पड़ताल की गई, उनका इस्तेमाल कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट, यूपीआई से जुड़े मामलों और ट्रेडिंग धोखाधड़ी में किया गया था. आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन जब्त किए गए.
साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने लोगों को सलाह दी कि वे ऑनलाइन लोन लेने से पहले कंपनियों की जानकारी की पुष्टि करें और अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक या सिम कार्ड दूसरों को न दें.
इसके साथ ही उन्होंने फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर इन्वेस्टमेंट से जुड़े ऐसे विज्ञापनों से भी सावधान रहने को कहा, जिनमें कम समय में बहुत ज़्यादा रिटर्न का वादा किया जाता है.
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डीके/डीकेपी