गणपति बप्पा की मूर्तियों का बदला ट्रेंड और पोषाक : कोल्हापुर के मूर्तिकार

New Delhi/Mumbai , 12 सितंबर . हिंदू धर्म का एक प्रमुख और प्रसिद्ध त्योहार गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाया जाने वाला है. इसको लेकर देश भर में तैयारियां तेज हैं. वहीं, बदलते समय के साथ गणपति की मूर्तियों का ट्रेंड भी बदल रहा है. पारंपरिक धोती, फेटा और सजावटी कपड़े पॉपुलर हो रहे हैं. मूर्तिकारों ने गणेशोत्सव से पहले क्रिएटिव तरीके से सजी मूर्तियों की भारी मांग बताई है.

इसको लेकर Maharashtra के कोल्हापुर के मूर्तिकार ने Saturday को से बात करते हुए कहा कि आज के समय में गणपति के कपड़े को लेकर एक नया ट्रेंड शुरू हो गया है. बप्पा की मूर्ति का श्रृंगार धोतर (धोती), फेटा (शाही पगड़ी) और शेला (अंगवस्त्र) से पसंद किया जाता है. इसलिए हम भी बप्पा की पोशाक इसी प्रकार रखते हैं.

उन्होंने कहा कि इसके लिए वह छह माह पहले से ही बप्पा को बनाने और सजाने की तैयारियां शुरू कर देते हैं. कोल्हापुर के मूर्तिकार ने बताया कि वह पिछले छह वर्षों से बप्पा को बनाने और सजाने का काम कर रहे हैं, लेकिन गणपति को इस प्रकार से सजाने का ट्रेंड कोल्हापुर में अब पहुंचा है.

उन्होंने बताया कि वह एक वर्ष में लगभग 5,000 से 6,000 गणेश की मूर्तियां बनाते हैं. इस बार लगभग 600 धोती और 400 गणपति को पगड़ी पहनाई है. वह बप्पा को पहनाने का पूरा वस्त्र सूरत से और आभूषण Mumbai और दिल्ली से मंगवाते हैं. वह फैशन टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग के छात्र हैं. उनके बड़े भाई ने भी इसी की पढ़ाई की है और दोनों भाई इस बिजनेस को फुल टाइम जॉब के रूप में करते हैं.

गणेश चतुर्थी की तैयारियां जोर पकड़ रही हैं. भक्त मूर्तियां खरीदने के लिए बाजारों में जा रहे हैं, जिनकी कीमतें 100 से 12,000 रुपए तक हैं. हालांकि, दिल्ली के मूर्तिकारों का कहना है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष कम खरीदार आए हैं, लेकिन उन्हें त्योहार से पहले अच्छी बिक्री की उम्मीद है.

दिल्ली के एक मूर्तिकार, होरी लाल ने कहा कि इस वर्ष गणपति की बिक्री बहुत कम हुई है. बाजार में ग्राहक ही नहीं हैं. देखते हैं आगे क्या होता है. ग्राहकों की बहुत कमी है. मुश्किल से पूरे दिन में एक-दो मूर्तियां बिकती हैं. पहले ग्राहक काफी पहले ही बुकिंग कर लेते थे, लेकिन इस वर्ष ऐसा नहीं हुआ है. बहुत सारी मूर्तियां बची हैं. अगर इनकी बिक्री नहीं होगी, तो बहुत नुकसान हो जाएगा.

दिल्ली के एक अन्य मूर्तिकार, ओमेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने गणपति की मूर्ति सादा मिट्टियों से बनाई है, जिनमें बहुत ही कम केमिकल वाले अच्छे रंगों का इस्तेमाल किया गया है, जो कि विसर्जन के दौरान पानी में बहुत आसानी से घुल जाएंगे. महंगाई की वजह से ग्राहक बहुत कम आ रहे हैं. हालांकि, अभी समय है. 14 और 15 सितंबर को गणेश चतुर्थी है. तब तक हो सकता है कि हमारी मूर्तियां बिक जाएं.

डीके/एबीएम

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