
कोलकाता, 18 सितंबर . Enforcement Directorate (ईडी) के कोलकाता जोनल ऑफिस ने जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है. ईडी ने ‘गांगुली होम सर्च प्राइवेट लिमिटेड’ के डायरेक्टर अमित गांगुली को 15 सितंबर को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया है.
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को 16 सितंबर को कोलकाता के विचार भवन स्थित स्पेशल कोर्ट के सामने पेश किया गया, जहां कोर्ट ने ईडी को 4 दिन की कस्टडी दी है.
ईडी ने यह जांच पश्चिम बंगाल Police द्वारा दर्ज कई First Information Report के आधार पर शुरू की थी. ये First Information Report आईपीसी की धारा 120बी, 419, 420, 423, 467 और 471 के तहत दर्ज शेड्यूल्ड ऑफेंस से जुड़ी हैं.
ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि अमित गांगुली अपने साथियों और विभिन्न संस्थाओं के साथ मिलकर धोखाधड़ी और जालसाजी के जरिए लोगों और संस्थाओं की कीमती अचल संपत्तियों को गैर-कानूनी तरीके से हासिल करता था, उन पर कब्जा करता था और उनका ट्रांसफर कर देता था. जांच में पता चला कि आरोपी संपत्तियों पर झूठा अधिकार दिखाने के लिए जाली और मनगढ़ंत सेल डीड, एग्रीमेंट, पावर ऑफ अटॉर्नी, गिफ्ट डीड, बोर्ड रिजॉल्यूशन और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल करता था. असली मालिकों के कब्जे और मालिकाना हक में दखल देने के लिए झूठे दावों और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन और म्युनिसिपल रिकॉर्ड में भी हेरफेर की जाती थी.
ईडी के मुताबिक, अमित गांगुली जमीन मालिकों के साथ जॉइंट वेंचर (जेवी) करके प्रॉपर्टी पर डेवलपमेंट राइट्स हासिल करता था और फिर जानबूझकर जमीन मालिकों को उनका कानूनी हक नहीं देता था. दस्तावेजों में हेरफेर कर वह संपत्तियों पर अपना कब्जा दिखाता था. ऐसी आपराधिक गतिविधियों से मिलने वाली कमाई और संपत्ति के अधिकार पीएमएलए के तहत ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ माने गए हैं.
अधिकारियों ने बताया कि अमित गांगुली के खिलाफ लगभग 23 First Information Report दर्ज हैं. उसने इसी तरीके से कई निवेशकों और जमीन मालिकों के साथ धोखाधड़ी की है.
इससे पहले ईडी ने 28 मार्च को अमित गांगुली के ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसमें आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और अन्य रिकॉर्ड जब्त किए गए थे. जब्त सामग्री की जांच से पता चला कि रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स और अन्य अचल संपत्तियों से जुड़े मामलों में अमित गांगुली का विभिन्न स्थानीय अधिकारियों और कर्मचारियों पर प्रभाव था.
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एससीएच/डीकेपी