‘कोई हमें दबाव में नहीं ला सकता’, विपक्ष के मार्च पर Supreme Court सख्त

New Delhi, 15 अक्टूबर . Supreme Court ने 12 अक्टूबर को इंडिया ब्लॉक के नेताओं के विरोध मार्च के बाद अदालत परिसर और उसके आसपास Political प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए दिशा-निर्देश तय करने की मांग वाली याचिका पर Thursday को नोटिस जारी किया. मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि कोई भी Supreme Court पर दबाव नहीं बना सकता. अदालत ने इस घटनाक्रम से जुड़े cctv फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया.

सीजेआई सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया की दलीलें सुनने के बाद नोटिस जारी किया. भाटिया ने कहा कि यह स्वीकार्य नहीं है कि Supreme Court को भी किसी Political जुलूस जैसी स्थिति का सामना करना पड़े.

इस पर सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा, “कोई हमें दबाव में नहीं ला सकता.” पीठ ने कहा कि इस तरह के प्रयास कमजोर हैं और इन पर कोई ध्यान नहीं देता. Supreme Court ने टिप्पणी की, “हम हाथीदांत के टावरों में बैठकर काम नहीं कर रहे हैं. हमें पता है कि वे बाहर क्या बयान देते हैं और अदालत के अंदर क्या कहते हैं. हमें सब कुछ पता है.”

यह मामला चार अधिवक्ताओं की ओर से दायर याचिकाओं से जुड़ा है. याचिकाओं में Supreme Court और विभिन्न हाई कोर्ट के आसपास Political जुलूसों और प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए एक समान व्यवस्था बनाने की मांग की गई है. साथ ही, अदालत परिसरों के भीतर Political विरोध-प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया गया है.

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि Political लामबंदी को न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने या लंबित मामलों में अदालतों पर दबाव बनाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. याचिकाओं में 12 अक्टूबर की घटना से संबंधित cctv फुटेज, आगंतुकों के रिकॉर्ड, प्रवेश और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े दस्तावेजों तथा अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है. इसके अलावा, संबंधित Political नेताओं के आचरण की जांच करने और यदि मामला बनता है तो उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही पर विचार करने का अनुरोध किया गया है.

यह विवाद 12 अक्टूबर को इंडिया ब्लॉक के नेताओं की ओर से Supreme Court की तरफ निकाले गए विरोध मार्च के बाद सामने आया. इस मार्च में Lok Sabha में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत विपक्षी नेता शामिल थे. उनका उद्देश्य मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर अपनी चिंताओं को सामने रखना था.

यह घटनाक्रम उस समय सामने आया, जब सीजेआई सूर्यकांत ने राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के उस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया था, जिसमें उन्होंने मुलाकात कर एसआईआर के मुद्दे पर ज्ञापन सौंपने की इच्छा जताई थी. सीजेआई ने कहा था कि उनके पत्र में उठाए गए मुद्दे पहले से ही Supreme Court के समक्ष लंबित हैं.

विपक्षी नेताओं को दिए गए जवाब में सीजेआई ने स्पष्ट किया था कि लंबित मामलों पर चर्चा करने के लिए बैठक बुलाना शक्तियों के पृथक्करण के संवैधानिक सिद्धांत के विपरीत होगा. शक्तियों का पृथक्करण संविधान के मूल ढांचे का अभिन्न हिस्सा है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि विपक्षी नेताओं के पत्र में उठाए गए मुद्दों पर कार्रवाई करने के लिए Supreme Court के पास प्रशासनिक अधिकार नहीं हैं, लेकिन नागरिकों के अधिकारों को प्रभावित करने वाले मामलों की न्यायिक समीक्षा करना अदालत का दायित्व है.

सीजेआई ने विपक्षी नेताओं को स्थापित कानूनी प्रक्रिया के तहत Supreme Court का रुख करने की सलाह दी थी. साथ ही आश्वासन दिया था कि कानून के अनुरूप दायर याचिका पर जल्द से जल्द सुनवाई की जाएगी. इसके बाद राहुल गांधी ने घोषणा की थी कि इंडिया ब्लॉक के नेता औपचारिक याचिका के माध्यम से Supreme Court का रुख करेंगे. उन्होंने संविधान और लोकतंत्र के समर्थन में नागरिकों से भी उनके अभियान में शामिल होने की अपील की थी.

इससे पहले Thursday को Supreme Court ने राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक के 12 अन्य नेताओं की ओर से दायर उस याचिका पर भी चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया, जिसमें एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती दी गई है. सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने निर्देश दिया कि इस याचिका को विभिन्न राज्यों में एसआईआर की वैधता को चुनौती देने वाली पहले से लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया जाए.

पीठ ने कहा, “हम नोटिस जारी कर रहे हैं और मामले को पहले से लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ रहे हैं.” सुनवाई के दौरान Supreme Court ने यह भी कहा कि अगली तारीख पर याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा. हालांकि, अदालत ने फिलहाल संबंधित याचिकाकर्ता की पहचान उजागर नहीं की.

पीठ ने कहा कि वह अगली सुनवाई पर एक याचिकाकर्ता से उसके आचरण के बारे में पूछना चाहेगी. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित याचिकाकर्ता के संबंध में नोटिस पर फिलहाल अस्थायी रूप से विचार किया जाएगा और यह उसके आचरण के बारे में स्पष्टीकरण देने पर निर्भर करेगा.

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डीएससी

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