केरल स्थानीय निकाय उपचुनाव: सीएम वीडी सतीशन की पहली परीक्षा, 38 स्थानीय निकाय वार्डों में वोटिंग जारी

तिरुवनंतपुरम, 28 सितंबर . कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ की विधानसभा चुनाव में शानदार जीत के चार महीने बाद केरल Monday को एक और चुनावी परीक्षा से गुजर रहा है, जिसमें राज्य भर के 38 स्थानीय निकाय वार्डों में मतदान जारी है.

इन उपचुनावों पर वी.डी. सतीशन Government के पहले बड़े Political बैरोमीटर के तौर पर बारीकी से नजर रखी जा रही है. Government ने सत्ता में आने के बाद मजबूत शुरुआत की थी लेकिन तब से उसे कई Political चुनौतियों का सामना करना पड़ा है.

इससे भी अहम बात यह है कि नतीजों से पता चल सकता है कि क्या वाम-विरोधी माहौल, जिसने मई में यूडीएफ को विधानसभा की 140 में से 102 सीटों पर शानदार जीत दिलाई थी, जमीनी स्तर पर अभी भी बना हुआ है.

वोटिंग Monday सुबह 7 बजे शुरू हुई और शाम 6 बजे तक चलेगी. वोटों की गिनती Tuesday सुबह होगी और दोपहर तक नतीजे आने की उम्मीद है.

मई के नतीजों ने पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली एलडीएफ के एक दशक लंबे शासन को खत्म कर दिया और लगातार तीसरी बार ऐतिहासिक जीत हासिल करने की उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. केरल की राजनीति में यूडीएफ की जीत का पैमाना अभूतपूर्व था.

वहीं, 38 वार्डों का यह मुकाबला अब यह परखने का पहला मौका देता है कि क्या वह जनादेश एक स्थायी Political बदलाव था या मुख्य रूप से विधानसभा चुनाव तक ही सीमित था.

यह मुकाबला पूरे केरल में फैला हुआ है, जिसमें एर्नाकुलम और कोझिकोड में दो कॉर्पोरेशन वार्ड, त्रिशूर, पलक्कड़ और कन्नूर में तीन नगरपालिका वार्ड, तीन जिला पंचायत डिवीजन, सात ब्लॉक पंचायत वार्ड और 23 ग्राम पंचायत वार्ड शामिल हैं.

कागज पर यूडीएफ को बढ़त हासिल है. 38 वार्डों में से 22 पर अभी यूडीएफ का कब्जा है और बाकी 15 वार्ड एलडीएफ के पास हैं.

विपक्ष ने बिजली की स्थिति और Chief Minister के हवाई सफर व मंत्रियों के विदेश दौरों से जुड़े विवादों का इस्तेमाल Government को निशाना बनाने के लिए किया.

यूडीएफ ने प्रियदर्शिनी योजना सहित अपनी कल्याणकारी पहलों को जनता के सामने रखकर इसका जवाब दिया.

एलडीएफ के लिए ये चुनाव विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद Political गिरावट को रोकने का एक शुरुआती मौका है. स्थानीय निकायों में अपनी स्थिति बनाए रखने या उसे फिर से हासिल करने से विपक्षी गठबंधन को बहुत जरूरी आत्मविश्वास मिलेगा.

भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने भी जोरदार प्रचार किया है और स्थानीय स्तर के मुकाबले में बढ़त हासिल करने की कोशिश कर रहा है.

इसलिए, दांव पर लगे 38 वार्डों की तुलना में यहां बहुत कुछ दांव पर लगा है. यूडीएफ के लिए यह इस बात की परीक्षा है कि क्या मई वाली लहर अभी भी बरकरार है.

एलडीएफ के लिए यह दिखाने का मौका है कि हालात बदल सकते हैं. Tuesday दोपहर तक नतीजों से जमीनी स्तर पर पहला जवाब मिलने की उम्मीद है.

–

एससीएच/पीएम

Leave a Comment