केरल में सतीशन सरकार के 100 दिन शासन के नए तौर-तरीकों के नाम रहे

तिरुवनंतपुरम, 25 अगस्त . एक दशक तक केरल में पिनाराई विजयन की शैली सख्त और केंद्रीकृत रही, जिसमें गलती मानकर माफी मांगने की गुंजाइश कम ही दिखती थी. इसके उलट, वी. डी. सतीशन ने उसी कुर्सी पर बिल्कुल अलग अंदाज में काम किया. वे ज्यादा संतुलित और संवाद में सहज नजर आए, और यह स्वीकार करने को भी तैयार दिखे कि Governmentों से भी चूक हो सकती है.

यह फर्क सतीशन के उस संदेश को और भी अहम बनाता है जो उन्होंने अपनी Government के 100 दिन पूरे होने पर दिया है कि Government आलोचना के लिए तैयार रहेगी, सही गलतियों को सुधारेगी, लेकिन अपने फायदे के लिए दबाव बनाने वालों के आगे नहीं झुकेगी.

Chief Minister सतीशन ने कहा, “100 दिन का समय कम होता है, लेकिन हम पूरे भरोसे के साथ कह सकते हैं कि Government ने सहानुभूति और अच्छे प्रशासन के अपने लक्ष्य की ओर गर्व के साथ कदम बढ़ाया है.”

यह एक ऐसे नेता का बयान है, जिनका करियर लगभग पूरी तरह से मंत्री परिषद के बाहर ही बना है. 2001 में विधानसभा में आने के बाद से सतीशन कभी मंत्री नहीं बने. उन्हें मुख्य रूप से विपक्ष में रहते हुए नेतृत्व का अनुभव मिला और 2021 से 2026 तक विपक्ष के नेता के तौर पर काम किया.

इसलिए, उनके शुरुआती 100 दिन सिर्फ़ नई यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) Government का पहला अध्याय नहीं हैं, बल्कि विपक्ष के एक मंझे हुए नेता से एक प्रशासक बनने की दिशा में यह उनकी पहली असली परीक्षा भी है.

इस बदलाव से एक ऐसी Government बनी है, जिसने तेजी से अपनी एक अलग सार्वजनिक छवि बनाई है. आम नागरिकों के लिए सचिवालय के दरवाजे खोलना, Police एस्कॉर्ट और सुरक्षा इंतजामों में कटौती करना और Chief Minister की कैबिनेट के बाद होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस को फिर से शुरू करने जैसे कदमों ने Government की सुलभ छवि पेश की है, जबकि पिछली Government अक्सर अपनी सत्ता और अधिकार का ही प्रदर्शन करती थी.

नीतिगत फैसलों ने भी सतीशन को शुरुआती सफलता का दावा करने का मौका दिया है. केरल स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (केएसआरटीसी) की साधारण बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की योजना, Political रूप से विवादित सिल्वरलाइन प्रोजेक्ट को रद्द करना, वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक अलग विभाग बनाना और ‘ऑपरेशन तूफान’ के जरिए ड्रग माफिया के खिलाफ कार्रवाई और पूर्व एडीएम नवीन बाबू की बेटी को नौकरी देकर कल्याण और संवेदनशीलता वाली छवि बनाने में मदद की है.

सप्लाईको की तरफ से सब्सिडी वाली 13 जरूरी चीजें उपलब्ध कराने, बाजार में दखल देने, वेलफेयर पेंशन का भुगतान करने और आशा व आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए बेहतर फ़ायदे देने की कोशिशों से Government को अपनी गवर्नेंस दिखाने का मौका मिला, खासकर रसोई के स्तर पर जहां लोग इसे सबसे ज्यादा महसूस करते हैं. लेकिन गलतियों को सुधारने के सतीशन के वादे का अब व्यावहारिक महत्व भी सामने आ गया है.

नियुक्तियों को लेकर विवाद, फैसले लेने में देरी और पीएम श्री पर Government के यू-टर्न ने कैबिनेट के प्रशासनिक अनुभव की कमी को उजागर कर दिया है, जिसमें कई मंत्री नए हैं. आलोचना के बाद फैसलों पर फिर से विचार करना पड़ा. यहीं पर सतीशन के काम करने के तरीके की असल परीक्षा होगी.

विजयन की Political ताकत ऐसे प्रशासन को पेश करने में थी जो शायद ही कभी झुकता हुआ नजर आता था.

सतीशन कुछ अलग करने की कोशिश कर रहे हैं. बिना अड़ियल हुए मज़बूत दिखना, कमजोर दिखे बिना लोगों की पहुंच में रहना और अपना Political दबदबा बनाए रखते हुए सलीके से पेश आना.

100 दिन बाद भी यह प्रयोग अभी शुरुआती दौर में ही है. Government से गलतियां हुई हैं, लेकिन उसने उनमें से कुछ को सुधारने की इच्छा भी दिखाई है. एक ऐसे नेता के लिए जिसने 25 साल कैबिनेट से बाहर बिताए हों, यह शायद सबसे अहम शुरुआत हो सकती है. सतीशन ने वह पद संभाला है जिस पर एक दशक तक विजयन का दबदबा रहा. अब उनके सामने असली चुनौती यह साबित करना है कि एक अलग अंदाज से भी उतना ही असरदार शासन चलाया जा सकता है.

ओपी/एएस

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