केरल में बिजली संकट को लेकर सियासी जंग तेज, केएसईबी के पूर्व अध्यक्ष ने पिनाराई विजयन पर साधा निशाना

तिरुवनंतपुरम, 12 सितंबर . केरल में गहराते बिजली संकट को लेकर Political विवाद और तेज हो गया है. केरल राज्य विद्युत बोर्ड (केएसईबी) के पूर्व अध्यक्ष बी. अशोक ने लंबी अवधि के बिजली खरीद समझौतों को रद्द किए जाने के मुद्दे पर पूर्व Chief Minister पिनाराई विजयन पर निशाना साधा.

आईएएस अधिकारी बी अशोक ने विजयन की आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि यह पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) Government के दौरान लिए गए फैसलों की जिम्मेदारी अधिकारियों पर डालने की कोशिश है.

उन्होंने कहा कि इन समझौतों से संबंधित सभी आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध हैं और वे पूरे मामले की सच्चाई सामने ला सकते हैं. अशोक ने दावा किया कि इस मामले में केएसईबी अधिकारियों की ओर से कोई लापरवाही नहीं हुई थी.

हालांकि, यह विवाद केवल बिजली खरीद समझौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक पुराना Political और प्रशासनिक विवाद भी जुड़ा हुआ है.

1998 बैच के आईएएस अधिकारी बी. अशोक और पिछली एलडीएफ Government के बीच संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं. अप्रैल में विजयन Government ने एक इंटरव्यू में तत्कालीन Government के कामकाज की कथित आलोचना करने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया था.

उन पर बिना अनुमति मीडिया से बात करने और Government की छवि को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए थे. करीब डेढ़ महीने तक निलंबित रहने के बाद जून में नई सतीशन Government ने उन्हें बहाल कर दिया था.

इसी पृष्ठभूमि में विजयन पर अशोक का ताजा हमला Political रूप से और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. विजयन की याददाश्त पर तंज कसते हुए अशोक ने आरोप लगाया कि पूर्व Chief Minister अधिकारियों को दोषी ठहराकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं.

इससे बिजली खरीद समझौतों से जुड़ा तकनीकी विवाद अब व्यक्तिगत और Political रंग भी लेता दिखाई दे रहा है.

इससे पहले पिनाराई विजयन ने एक विस्तृत फेसबुक पोस्ट में मौजूदा बिजली संकट के लिए उम्मन चांडी के नेतृत्व वाली यूडीएफ Government को जिम्मेदार ठहराया था. उन्होंने इस आरोप को भी खारिज किया था कि पिछली एलडीएफ Government द्वारा 465 मेगावाट के दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौते को रद्द करना वर्तमान संकट का कारण है.

वर्तमान सतीशन Government का आरोप है कि इसी समझौते को रद्द करने के कारण राज्य में रात के समय बिजली कटौती की स्थिति पैदा हुई है. इससे आम लोगों में नाराजगी बढ़ रही है, क्योंकि विजयन के लगभग दस साल के शासनकाल के दौरान बिजली कटौती की घटनाएं अपेक्षाकृत कम थीं.

विजयन ने कहा कि वर्ष 2015 में तत्कालीन यूडीएफ Government द्वारा किया गया मूल समझौता कानूनी खामियों से भरा हुआ था, क्योंकि उसे नियामक आयोग या Government की पूर्व मंजूरी के बिना किया गया था.

उनका दावा है कि बाद में एलडीएफ Government ने उस समझौते को बचाने के लिए संघर्ष किया और मामला Supreme Court तक भी ले गई.

विजयन ने यह भी कहा कि उनकी Government ने लगभग 6,100 मेगावाट की उच्चतम बिजली मांग का सामना बिना बिजली कटौती के किया था. इसके लिए अन्य राज्यों के साथ बिजली खरीद और पावर-स्वैप व्यवस्था का सहारा लिया गया था.

वहीं, बी. अशोक का कहना है कि मौजूदा संकट की असली वजह दीर्घकालिक योजना की कमी है. उन्होंने विशेष रूप से दिन में उत्पन्न होने वाली नवीकरणीय ऊर्जा को रात में उपयोग के लिए सुरक्षित रखने हेतु पर्याप्त भंडारण व्यवस्था नहीं होने को बड़ी समस्या बताया.

दूसरी ओर, विजयन ने आरोप लगाया है कि यूडीएफ Government जानबूझकर बिजली संकट पैदा कर रही है, ताकि केएसईबी को कमजोर किया जा सके और बाद में बिजली क्षेत्र के निजीकरण का रास्ता तैयार किया जा सके.

अशोक ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसे दावे राज्य के बिजली क्षेत्र की वास्तविक प्रशासनिक और तकनीकी समस्याओं को नहीं छिपा सकते.

बिजली की कमी और भविष्य में और अधिक प्रतिबंधों की आशंका के बीच जनता की चिंता बढ़ रही है. ऐसे में अशोक और विजयन के बीच टकराव ने न केवल विवादित बिजली समझौतों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है, बल्कि उनसे जुड़े Political और प्रशासनिक संघर्षों को भी एक बार फिर उजागर कर दिया है.

एएमटी/डीकेपी

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