केरल में आरटीआई छूट पर विवाद, भाजपा ने सतीशन सरकार पर नेताओं को बचाने का लगाया आरोप

तिरुवनंतपुरम, 23 अक्टूबर . भाजपा के राष्ट्रीय सचिव के. सुरेंद्रन ने Friday को वीडी सतीशन Government पर सतर्कता विभाग के कुछ प्रमुख अनुभागों (टी अनुभागों) को सूचना के अधिकार अधिनियम से छूट देकर भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे Political नेताओं और अधिकारियों को बचाने का प्रयास करने का आरोप लगाया.
गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने इस निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि टी अनुभागों को इसलिए छूट दी गई है क्योंकि सतर्कता विभाग की जांच गोपनीय प्रकृति की होती है. उन्होंने कहा कि जांच और विभाग के कामकाज के लिए गोपनीयता आवश्यक है.
चेन्निथला ने कहा कि पिछली Government ने टी अनुभागों को सूचना के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत लाया था, जबकि वास्तव में ये अनुभाग इसके दायरे में नहीं आते हैं. सुरेंद्रन ने पारदर्शिता कानून से टी-1 और टी-2 अनुभागों को छूट देने वाली नवीनतम अधिसूचना को अलोकतांत्रिक और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का प्रयास बताया.
इन अनुभागों में Chief Minister , मंत्रियों, Political नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों से संबंधित गोपनीय फाइलें रखी जाती हैं.
निर्णय के समय पर सवाल उठाते हुए भाजपा नेता ने पूछा कि क्या इसका उद्देश्य पूर्व Chief Minister और सीपीआई (एम) नेता पिनाराई विजयन (जो अब विपक्ष के नेता हैं) के खिलाफ सतर्कता जांच को कमजोर करना है?
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि Government के पास वर्तमान यूडीएफ प्रशासन में कुछ मंत्रियों को बचाने और जांच का सामना कर रहे लोगों को राहत दिलाने के लिए कारण हैं. सुरेंद्रन ने सतर्कता निदेशक को यह तय करने का पूर्ण अधिकार देने के निर्णय पर चिंता व्यक्त की कि किन फाइलों को टी-अनुभागों के तहत रखा जाना चाहिए.
उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की विवेकाधीन शक्तियों का दुरुपयोग उन मामलों को जनता की नजरों से दूर रखने के लिए किया जा सकता है जिन्हें Political नेतृत्व छुपाना चाहता है.
भाजपा नेता ने कहा कि यह कदम कोई नया उदाहरण नहीं है. उन्होंने बताया कि 2016 में, आरटीआई अधिनियम से टी धाराओं को छूट देने के इसी तरह के प्रयास के कारण केरल उच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा और Governmentी आदेश पर रोक लगानी पड़ी थी.
सुरेंद्रन ने मौजूदा Government पर पिछली गलती दोहराने का आरोप लगाते हुए कहा कि यूडीएफ और एलडीएफ दोनों ने सतर्कता विभाग को पारदर्शिता कानून से बाहर रखने की कोशिश की थी.
उन्होंने कहा कि ओमन चांडी के नेतृत्व वाली यूडीएफ Government ने 2016 में ऐसी छूट पाने का प्रयास किया था, जबकि पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली एलडीएफ Government ने 2025 में ऐसा ही प्रयास किया था.
सुरेंद्रन के मुताबिक, दोनों Political मोर्चों ने बार-बार यह साबित किया है कि भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे लोगों को बचाने और संवेदनशील मामलों को जनता की नजरों से दूर रखने के मामले में वे एक समान हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि नवीनतम अधिसूचना सत्ता में बैठे लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतों के निपटारे में पारदर्शिता को कमजोर करेगी.
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एएसएच/डीकेपी


