केरल पीएससी भर्ती घोटाले के विस्तार के बीच कांग्रेस ने अध्यक्ष और सदस्यों को हटाने की मांग की

तिरुवनंतपुरम, 31 अक्टूबर . केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) भर्ती घोटाले में क्राइम ब्रांच की जांच तेज होने के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता एमएम हसन ने Saturday को राज्य Government से President को पीएससी अध्यक्ष और सभी सदस्यों को हटाने की सिफारिश करने की मांग की. उन्होंने कहा कि उनका पद पर बने रहना अब कानूनी या नैतिक रूप से उचित नहीं है.
यह मांग जांच में हुए कई घटनाक्रमों के बीच आई है. पीएससी अध्यक्ष एमआर बैजू और आयोग के तीन सदस्यों से क्राइम ब्रांच की विशेष जांच टीम (एसआईटी) पूछताछ कर चुकी है.
पीएससी सचिव साजू जॉर्ज Saturday को एसआईटी के समक्ष पूछताछ के लिए पेश हुए.
Friday रात को एसआईटी ने पीएससी परीक्षा विभाग के निलंबित अतिरिक्त सचिव आर. हरि को कोच्चि में एक रिश्तेदार के घर से गिरफ्तार किया.
वह पिछले कुछ दिनों से फरार थे. परीक्षा घोटाले में एक अन्य आरोपी सेवानिवृत्त उप सचिव पी. सतीश को दो दिन पहले गिरफ्तार किया गया था और वह वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं.
एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, एसआईटी ने मत्स्य पालन विस्तार अधिकारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं के आरोप में अध्यक्ष बैजू, आयोग के सदस्यों और अधिकारियों के खिलाफ एक अलग मामला भी दर्ज किया है.
जांचकर्ताओं का आरोप है कि रैंकिंग में हेरफेर करके अयोग्य उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाने के लिए आधिकारिक शक्तियों का दुरुपयोग किया गया, जिससे योग्य उम्मीदवारों को उनके उचित अवसर से वंचित किया गया और संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा.
जांच में राज्य योजना बोर्ड में भर्ती में कथित अनियमितताओं का भी खुलासा हुआ है, जहां अधिकारियों पर मूल्यांकन प्रक्रिया में हेरफेर करने का आरोप है.
हाई कोर्ट ने हाल ही में जांच की धीमी गति पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सवाल उठाया था कि प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार या पूछताछ क्यों नहीं की गई.
हसन ने कहा कि केरल में क्राइम ब्रांच द्वारा पीएससी अध्यक्ष और सदस्यों से पूछताछ अभूतपूर्व है.
निवर्तमान Governor राजेंद्र वी. अर्लेकर ने इससे पहले President को पत्र लिखकर अध्यक्ष और 15 सदस्यों वाले 16 सदस्यीय पीएससी बोर्ड को हटाने की मांग की थी.
हसन ने कहा कि वीडी सतीशन Government को उन्हें हटाने के लिए तत्काल संवैधानिक प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए.
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जांच जारी रहने तक अध्यक्ष और सदस्यों को उनके आधिकारिक दायित्वों से दूर रखने की संभावना पर विचार किया जाना चाहिए.
हसन ने आयोग पर बेरोजगार युवाओं के साथ विश्वासघात करने और भर्ती प्रणाली में जनता के विश्वास को नष्ट करने का आरोप लगाते हुए कहा कि Government गंभीर आरोपों का सामना कर रहे लोगों को पद पर बने रहने की अनुमति नहीं दे सकती.
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