केरल के गृह मंत्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े 2006 के मामले में विजिलेंस जांच के दिए आदेश

तिरुवनंतपुरम, 4 अक्टूबर . केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने Sunday को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विजिलेंस जांच के नए आदेश दिए. यह जांच राज्य के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के सचिव के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान लगे आरोपों से जुड़ी है और इसके लिए कांग्रेस नेता मलयिनकीझु वेणुगोपाल ने याचिका दायर की थी.

यह मामला मलेशियाई सिविल इंजीनियर लीसी बीन से जुड़ा है, जिन्होंने नवंबर 2006 में केरल से लौटने के बाद कुआलालंपुर में आत्महत्या कर ली थी. वह पीएचीआई-बीईएल कंसोर्टियम से जुड़े थे, जो केरल राज्य परिवहन परियोजना (केएसटीपी) के तहत एमसी रोड को अपग्रेड करने का काम कर रहा था.

खबरों के अनुसार, इंजीनियर के कथित सुसाइड नोट में कुमार का नाम था, जो उस समय पीडब्ल्यूडी सचिव के पद पर थे. यह मामला परियोजना से जुड़ी कथित अनियमितताओं और इन दावों से संबंधित है कि बाहरी दबाव के कारण 2006 में की गई शुरुआती विजिलेंस जांच पटरी से उतर गई थी.

इन आरोपों पर कार्रवाई करते हुए राज्य के गृह विभाग ने विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (वीएसीबी) द्वारा पहले की गई जांच से जुड़ी सभी संबंधित फाइलें मांगी हैं. इन रिकॉर्ड्स की जांच करके यह पता लगाया जाएगा कि मूल कार्यवाही कैसे की गई थी और क्या बाहरी प्रभाव ने इसकी दिशा को प्रभावित किया था.

केरल के गृह मंत्री के कार्यालय के अनुसार, चेन्निथला ने विजिलेंस डायरेक्टर को दखलंदाजी के आरोपों की पूरी जांच करने और जांच के नतीजों के आधार पर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. मंत्री ने कहा कि बाहरी दखल के आरोप गंभीर हैं और इनकी विस्तृत जांच होनी चाहिए. नई जांच में उन हालात पर ध्यान दिया जाएगा, जिनमें शुरुआती जांच की गई थी और उस समय उठाए गए आरोपों को कैसे संभाला गया था.

बता दें कि मलेशियाई सिविल इंजीनियर लीसी बीन ने उस कंसोर्टियम के साथ काम किया था, जिसे एमसी रोड को अपग्रेड करने का काम सौंपा गया था, यह केरल राज्य परिवहन परियोजना का एक अहम हिस्सा था. बाद में उनकी मौत को सड़क सुधार के कामों के प्रशासन और उन्हें पूरा करने से जुड़े आरोपों से जोड़कर देखा जाने लगा.

Government के इस नए कदम का आधार वेणुगोपाल की याचिका है. यह नई जांच उन आरोपों के बाद शुरू की गई है जिनमें कहा गया था कि पिछली जांच बाहरी दबाव के कारण पटरी से उतर गई थी, जिसके बाद राज्य के गृह विभाग ने दोबारा जांच के लिए रिकॉर्ड मंगाए.

कथित सुसाइड नोट में कुमार का जो जिक्र होने की बात कही जा रही है, वह जांच का विषय है. न तो उस कथित जिक्र से और न ही नई जांच की घोषणा से यह साबित होता है कि उन्होंने कोई गलत काम किया है.

आगे की कार्रवाई विजिलेंस की जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी. Government का तत्काल निर्देश है कि रिकॉर्ड हासिल किए जाएं, दखलंदाजी के आरोपों की जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि क्या मूल कार्यवाही में कोई गड़बड़ी हुई थी, ताकि यह तय किया जा सके कि आगे क्या कदम उठाए जाने चाहिए.

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ओपी/पीएम

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