केरलः सीपीआई (एम) की बैठक में चुनाव में हार के लिए विजयन और एमवी गोविंदन पर उठे सवाल

कोझिकोड, 14 सितंबर . सीपीआई (एम) के मजबूत गढ़ कन्नूर में ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की अप्रत्यक्ष रूप से आलोचना हो रही है. राज्य समिति की विस्तारित बैठक में प्रतिनिधियों ने पार्टी की करारी चुनावी हार का दोष आम कार्यकर्ताओं और निचले स्तर की समितियों पर मढ़ने की कोशिश पर सवाल उठाए हैं.

बातचीत के पहले दिन के आखिर में कई लोगों को हैरानी इस बात से हुई कि पार्टी के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन द्वारा पेश की गई सुधार रिपोर्ट के मसौदे की सबसे तीखी आलोचना कन्नूर के प्रतिनिधियों ने की.

उन्होंने तर्क दिया कि पार्टी की नाकामियों के लिए आम कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, जबकि फैसले लेने की असली ताकत राज्य के नेतृत्व और अहम फैसले लेने वालों के पास थी.

इसके बाद कोल्लम के प्रतिनिधियों ने भी इसी तरह की आलोचना की, जिससे पता चला कि नाराजगी सिर्फ कन्नूर तक ही सीमित नहीं थी.

इसलिए, इस बातचीत ने पूर्व Chief Minister पिनाराई विजयन और एम.वी. गोविंदन पर परोक्ष रूप से दबाव डाला है, भले ही आलोचना को पूरी तरह से व्यक्तिगत हमलों के तौर पर पेश नहीं किया गया था.

प्रतिनिधियों ने पार्टी कार्यकर्ताओं से आत्मसुधार करने के लिए कहने के तर्क पर सवाल उठाए, जबकि शीर्ष पर बैठे लोग अपने फैसलों की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं थे.

उन्होंने पार्टी के ऊंचे पदों पर बैठे लोगों की संसदीय महत्वाकांक्षाओं और लंबे समय तक सत्ता में रहने के दौरान पार्टी में पनपी व्यक्ति-केंद्रित राजनीति की भी आलोचना की.

इस ड्राफ्ट रिपोर्ट की खास तौर पर इसलिए आलोचना की गई, क्योंकि इसमें हार की अधिकतर जिम्मेदारी संगठन के निचले स्तरों पर डाली गई थी. प्रतिनिधियों का तर्क था कि जिन समस्याओं का समाधान राज्य नेतृत्व को करना चाहिए था, उन्हें जमा होने दिया गया, जिससे आखिरकार पार्टी का पतन हुआ.

रिपोर्ट में तालिपारम्बा में उम्मीदवार चयन से जुड़े विवाद का जिक्र न होने पर भी सवाल उठाए गए. हालांकि रिपोर्ट में उम्मीदवार चुनने में हुई गलतियों और पय्यानूर में मिली हार का जिक्र है, लेकिन प्रतिनिधियों ने सवाल उठाया कि तालिपारम्बा में मिली हार पर वैसा ध्यान क्यों नहीं दिया गया.

बातचीत के दौरान के.के. शैलजा को दूसरी सीट पर भेजने के फैसले और ए.एन. शमसीर की उम्मीदवारी को संभालने के तरीके पर भी सवाल उठाए गए.

कन्नूर के प्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी ने एक ऐसा सिस्टम बना लिया है, जिसमें नेताओं और आम कार्यकर्ताओं के लिए अलग-अलग नियम लागू होते हैं.

उन्होंने तर्क दिया कि नेतृत्व के करीबी लोगों का बचाव करने और दूसरों की आलोचना करने के चलन ने पार्टी की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया है. बैठक में संगठन के बड़े संकट पर भी खास तौर पर चर्चा हुई. प्रतिनिधियों ने पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक के घटने, सक्रिय सदस्यों की संख्या में कमी और जन-संगठनों से मिलने वाले समर्थन के कमजोर होने की ओर इशारा किया.

पार्टी नेताओं की लोगों से सीधे जुड़ने और पार्टी के Political रुख को असरदार ढंग से समझाने में नाकामी पर भी जोर दिया गया. ड्राफ्ट रिपोर्ट में केंद्रीय एजेंसियों और Enforcement Directorate (विजयन और उनके परिवार के खिलाफ) की जांच को पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती के तौर पर दिखाने की कोशिश की गई लेकिन इससे प्रतिनिधियों के बीच अधिक सहानुभूति नहीं बन पाई.

इसके बजाय, चर्चाओं से यह संदेश मिला कि सीपीआई (एम) का मौजूदा संकट काफी हद तक अंदरूनी है.

2021 के विधानसभा चुनाव के बाद से सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा कोई भी चुनाव नहीं जीत पाया है और हालिया विधानसभा चुनावों में उसे करारी हार का सामना करना पड़ा. प्रतिनिधियों का कहना था कि लगातार हार से मिली चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया और मौजूदा संकट नेतृत्व की समय पर कार्रवाई न कर पाने का नतीजा है.

ओपी/पीएम

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