
Mumbai , 11 सितंबर . केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने Friday को राज्य Governmentों से आग्रह किया कि वे श्रमिक कल्याण के लिए एकत्र किए गए सेस फंड के उपयोग की विस्तृत समीक्षा करें, कमियों की पहचान करें और श्रमिकों के दीर्घकालिक कल्याण एवं सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसके प्रभावी इस्तेमाल के नए उपाय तलाशें.
Mumbai में आयोजित भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्री ने राज्यों से श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) के लागू होने के एक वर्ष बाद उनके प्रभाव का व्यापक आकलन करने और उन क्षेत्रों की पहचान करने को भी कहा, जहां बेहतर क्रियान्वयन की आवश्यकता है.
उन्होंने श्रम कानूनों से जुड़े पेशेवरों के लिए कार्यशालाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे श्रम संहिताओं को सही मायनों में प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी.
मंडाविया ने Prime Minister विकसित India रोजगार योजना के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह योजना रोजगार को बढ़ावा देने और कार्यबल में शामिल होने वाले नए लोगों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
उन्होंने राज्य Governmentों से उद्योग जगत और अन्य हितधारकों के साथ विशेष कार्यशालाएं और संवाद कार्यक्रम आयोजित करने का आग्रह किया, ताकि अधिक से अधिक लोगों को इस योजना की जानकारी मिल सके और पात्र लाभार्थी इसका लाभ उठा सकें.
मंत्री ने राज्यों के बीच सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान और बीओसीडब्ल्यू फंड के अधिकतम उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इससे श्रमिकों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवरेज प्रदान किया जा सकेगा.
उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ श्रम तंत्र को भी लगातार विकसित होने की जरूरत है और भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिकों के समग्र कल्याण के लिए केंद्र और राज्यों की सोच तथा नीतियों में तालमेल होना चाहिए.
मांडविया ने श्रमिकों को अधिक सम्मान, गरिमा और आत्मसम्मान देने के उपायों पर भी बल दिया. उन्होंने श्रमिकों के लिए पेंशन सहायता प्रदान करने की संभावना पर विचार करने की आवश्यकता जताई.
उन्होंने कहा कि दुनिया भर में कुशल और अर्धकुशल श्रमिकों की मांग बढ़ रही है, इसलिए India के कार्यबल को इन अवसरों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है.
Union Minister ने अंतरराष्ट्रीय श्रम गतिशीलता (इंटरनेशनल लेबर मोबिलिटी) पर भी चर्चा की आवश्यकता बताई. उन्होंने कहा कि इससे देश को प्रेषण (रेमिटेंस) के रूप में आर्थिक लाभ मिलेगा और India की युवा शक्ति की आकांक्षाओं को भी पूरा किया जा सकेगा.
उन्होंने केंद्र और राज्य Governmentों से समन्वित प्रयासों के जरिए अंतरराष्ट्रीय श्रम गतिशीलता के लिए एक व्यापक मंच विकसित करने का आह्वान किया, जिसमें आवश्यक वित्तीय और डिजिटल ढांचा भी उपलब्ध हो, ताकि भारतीय श्रमिक वैश्विक अवसरों का लाभ उठा सकें और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर India की विश्वसनीयता और मजबूत हो.
सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्रम एवं रोजगार सचिव डॉ. चंद्र भूषण कुमार ने कहा कि देश में निर्माण क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों की संख्या 7 करोड़ से अधिक है. उन्होंने बताया कि देशभर में बीओसीडब्ल्यू सेस फंड के रूप में करीब 77,000 करोड़ रुपए उपलब्ध हैं.
उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन राज्यों के बीच बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा करने और उद्योग जगत के साथ विचार-विमर्श करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है.
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एएमटी/डीकेपी