कुंभ-दिवाली पर हिंदू दुकानों से खरीदारी की अपील पर छिड़ा विवाद, विपक्ष ने साधा निशाना

New Delhi, 26 अक्टूबर . विपक्षी नेताओं ने Monday को Maharashtra के मंत्री नितेश राणे की विवादास्पद टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा कि राणे का मकसद सिर्फ दोनों समुदायों के बीच दुश्मनी और नफरत फैलाना है.
खबरों के मुताबिक, राणे ने एक सभा को संबोधित करते हुए ये विवादास्पद टिप्पणी की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि हिंदुओं को त्योहारों के दौरान सिर्फ हिंदू स्वामित्व वाली दुकानों से ही सामान खरीदना चाहिए. उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि मुस्लिम विक्रेताओं को नासिक कुंभ मेले में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.
इस मामले पर से बात करते हुए राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि मैं राणे के पिता को जानता हूं, जो पूर्व कांग्रेस नेता थे.
राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि कुछ लोग अवसरवादी हैं जो मंत्रिमंडल में पद पाने के लिए कभी भी पार्टी बदल सकते हैं. उनके पास कोई मौलिक विचार नहीं हैं. वे सिर्फ देश में दंगे और सांप्रदायिक नफरत फैलाने का काम करते हैं.
उन्होंने आगे कहा कि जो लोग अपने शब्दों से लोगों को भड़काते हैं, उन्हें खुद भी उनके द्वारा की गई हिंसा का परिणाम भुगतना पड़ता है.
वीरेंद्र ने कहा कि हिंदू, मुसलमान, ईसाई और सिख सभी ने देश की आजादी के लिए मिलकर संघर्ष किया था, और इस बात पर जोर दिया कि India एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, न कि हिंदू राष्ट्र.
उन्होंने यह भी मांग की कि राणे अपना बयान वापस लें और जनता से माफी मांगें.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने भी राणे की आलोचना करते हुए कहा कि मंत्री होने के नाते उन्हें संविधान की जानकारी होनी चाहिए और उन्होंने जो शपथ ली है उसे याद रखना चाहिए.
वडेट्टीवार ने कहा कि मंत्री होने के नाते उन्हें संविधान की जानकारी होनी चाहिए. उन्हें याद रखना चाहिए कि उन्होंने शपथ ली है. वे सिर्फ दो धर्मों के बीच दुश्मनी भड़काने के लिए इस पद पर हैं. यह आरएसएस और भाजपा की साजिश है.
उन्होंने आगे कहा कि क्या वे हिंदुओं के संरक्षक हैं? दो धर्मों के बीच फूट डालना उनका काम बन गया है.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद हुसैन दलवाई ने कहा कि ऐसे फैसले लेने में राणे की कोई भूमिका नहीं है.
दलवाई ने कहा कि इन फैसलों के लिए Chief Minister जिम्मेदार हैं. वे नहीं. उनके जैसे लोग सिर्फ दो धर्मों के बीच दुश्मनी पैदा कर सकते हैं.
उन्होंने राणे की टिप्पणियों से लोगों के खरीदारी निर्णयों पर पड़ने वाले प्रभाव की संभावना को भी खारिज कर दिया.
उन्होंने कहा कि लोग इसका पालन नहीं करेंगे. केवल गुणवत्तापूर्ण और किफायती वस्तुएं ही बिकेंगी. लोग यह नहीं देखेंगे कि दुकानदार हिंदू है या मुसलमान. यह सोचना गलत है कि इस बयान का कोई असर पड़ेगा.
खबरों के मुताबिक, राणे ने दावा किया कि मुसलमानों से सामान खरीदने में खर्च किया गया पैसा चरमपंथ को बढ़ावा देने में इस्तेमाल किया जाएगा.
उन्होंने आगे कहा कि हिंदुओं को केवल अन्य हिंदुओं से ही बातचीत करनी चाहिए, और जब मुसलमान धार्मिक त्योहार मनाते हैं, तो हिंदुओं को उनमें शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
इन टिप्पणियों की विपक्षी नेताओं ने कड़ी आलोचना की है, जिन्होंने राणे पर सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और उनसे अपने बयान वापस लेने की मांग की.
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