कश्मीरी पंडितों को धमकी पर सियासत, पीडीपी ने की आरोपियों की पहचान की मांग, कांग्रेस ने उठाए सवाल

New Delhi, 3 सितंबर . पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने Thursday को Government से उन लोगों की पहचान करने की मांग की जो कश्मीरी पंडितों को हाल ही में मिली धमकियों में शामिल हैं. यह घटना घाटी से उनके पलायन के कई दशकों बाद हुई है. वहीं, कांग्रेस और सीपीआई को इस बात पर संदेह था कि ये धमकियां असली हैं या नहीं, क्योंकि इनका इस्तेमाल Political फायदे के लिए किया जा सकता है.

ये प्रतिक्रियाएं उन दो चिट्ठियों के कुछ दिन बाद आई हैं, जो कथित तौर पर यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (यूसीएल) ने जारी की थी. इन चिट्ठियों में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को निशाना बनाया गया था और उनकी निजी जानकारी उजागर की गई थी.

पीडीपी प्रवक्ता मोहम्मद इकबाल ट्रैम्बू ने से ​​बातचीत में कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग, Political दल और नेता चाहते हैं कि कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास संभव हो सके. यह सबकी इच्छा है. अगर इसमें कोई बाधा है, तो उस पर ध्यान दिया जाना चाहिए. हमें यह पता लगाना होगा कि वे कौन लोग या एजेंसियां ​​हैं जो उनकी वापसी को रोक रही हैं, क्योंकि यह जम्मू-कश्मीर के लिए खतरनाक है.

हालांकि, सीपीआई सांसद पी संतोष कुमार ने कहा कि ये नई धमकियां असली हैं या नहीं, यह बात सबसे ज्यादा जरूरी है.

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगर ये धमकियां असली हैं, तो जाहिर है कि हम कश्मीरी पंडितों और कश्मीर के हर नागरिक के साथ हैं. कश्मीरी भी पूरी तरह से भारतीय हैं. इसलिए, हम भारतीयों के साथ खड़े हैं. लेकिन साथ ही, इस बात की ठीक से जांच होनी चाहिए कि ये धमकियां असली हैं या नहीं.

कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने आरोप लगाया कि ऐसी धमकियों के जरिए ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है जिससे केंद्र Government जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस न दे पाए. इसके अलावा, उन्होंने भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र Government पर संघीय ढांचे पर हमला करने का आरोप लगाया.

धमकियों के खिलाफ कार्रवाई न होने पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने केंद्र Government की आलोचना की. उन्होंने कहा कि Political फायदा उठाने के लिए बार-बार इस मुद्दे को उठाया जाता है. ऐसा नहीं होना चाहिए. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है.

इस बीच, जम्मू-कश्मीर भाजपा के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर निशाना साधा. पार्टी अध्यक्ष और पूर्व Chief Minister फारूक अब्दुल्ला ने सवाल उठाया था कि कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को धमकी भरे पत्र क्यों मिल रहे हैं, जबकि जम्मू-कश्मीर में तैनात वरिष्ठ हिंदू अधिकारियों को ऐसे पत्र नहीं मिल रहे हैं.

ठाकुर ने ​​कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस का रुख नरम अलगाववाद वाला है. वे किसी न किसी तरह Pakistan को क्लीन चिट दे रहे हैं. नेशनल कॉन्फ्रेंस की यही नीति रही है. कश्मीरी पंडितों को चौथी बार मिल रही धमकियां बहुत गंभीर मामला हैं. यह एजेंसियों और कश्मीरी पंडितों, दोनों के लिए चिंता का विषय है.

कश्मीरी पंडित भूषण लाल की मानें तो समुदाय के साथ ‘फुटबॉल’ जैसा बर्ताव किया जा रहा है. उन्होंने ​​कहा कि ऐसा लगता है जैसे हमें एक तरफ से दूसरी तरफ लात मारी जा सकती है.

ऐसी धमकियों पर निराशा जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि हम इसी जगह के रहने वाले हैं. हमें हर रोज यहां से चले जाने के नोटिस क्यों मिलते हैं? हमने क्या किया है? क्या यह हमारी मातृभूमि नहीं है? क्या हम इस देश के नागरिक नहीं हैं? क्या हम इस लोकतांत्रिक देश के निवासी नहीं हैं? हमने क्या अपराध किया है? क्या कश्मीरी पंडित होना ही हमारी एकमात्र गलती है? ऐसा लगता है कि कश्मीर में पैदा होना ही हमारी बदकिस्मती है.

भूषण लाल ने आगे कहा कि अपनी ही जमीन से विस्थापित हुए हमें 36 साल हो चुके हैं.

पीएसके

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