
Bengaluru, 24 अगस्त . हसन जिले की उपायुक्त के.एस. लता कुमारी और पूर्व Prime Minister एच.डी. देवेगौड़ा के पुत्र जेडी(एस) विधायक एच.डी. रेवन्ना के बीच जुबानी जंग छिड़ गई, जब रेवन्ना ने जिले में अधिकारी की तैनाती और कामकाज पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी की.
एचडी रेवन्ना केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के भाई हैं.
इस आदान-प्रदान ने Political गलियारों में चर्चा छेड़ दी है क्योंकि ग्राम पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद के बीच उपायुक्त का पक्ष सामने आया है.
उपायुक्त ने social media पर एक रहस्यमय पोस्ट साझा किया, जिसमें लिखा था, “अगर वे आपको नियंत्रित नहीं कर पाएंगे, तो वे आपसे नफरत करने लगेंगे.” यह पोस्ट रेवन्ना द्वारा हसन में मीडिया को संबोधित करते हुए अधिकारी के बारे में की गई आलोचनात्मक टिप्पणियों के कुछ दिनों बाद आया है.
आगामी ग्राम पंचायत चुनावों में आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा करते हुए रेवन्ना ने संबंधित अधिकारी के कामकाज पर सवाल उठाए. उन्होंने हसन के उपायुक्त के रूप में उनकी नियुक्ति का भी उपहास उड़ाया.
रेवन्ना ने कहा, “मैंने 30 साल तक विधायक के रूप में काम किया है और मैंने कभी ऐसी उपायुक्त नहीं देखी. मुझे नहीं पता कि वे उसे कहां से लाए हैं और यहां तैनात कर दिया है.”
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या हसन जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों में उपायुक्त ईमानदारी से काम कर रहे हैं.
Friday को जेडी(एस) के अन्य नेताओं की उपस्थिति में की गई ये टिप्पणियां अब उपायुक्त के social media पोस्ट के बाद चर्चा में आ गई हैं. हालांकि, लता कुमारी ने रेवन्ना का नाम नहीं लिया और न ही सीधे तौर पर उनकी टिप्पणियों का जिक्र किया. उनके पोस्ट को हालिया आलोचनाओं के संदर्भ में देखा जा रहा है.
हसन पूर्व Prime Minister देवेगौड़ा का पैतृक जिला है और इस परिवार का जिले में काफी प्रभाव है.
गौरतलब है कि विधायक एच.डी. रेवन्ना और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रोहिणी सिंदूरी के बीच हाई-प्रोफाइल टकराव 2017 और 2019 के बीच हसन जिले की उपायुक्त के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान चरम पर पहुंच गया था, जो प्रशासनिक नियंत्रण, स्थानीय कार्रवाई और Political हस्तक्षेप पर केंद्रित था.
रोहिणी सिंदूरी ने जिले में अवैध रेत भंडारण और खनन नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई की, जिसका कथित तौर पर सत्ताधारी दल से जुड़े स्थानीय Political पदाधिकारियों ने विरोध किया. अनधिकृत गतिविधियों के लिए जनता दल (सेकुलर) से संबद्ध स्थानीय पंचायत नेताओं को नोटिस जारी किए जाने पर तनाव और बढ़ गया.
उस समय के शक्तिशाली जिला प्रभारी मंत्री एच.डी. रेवन्ना ने कई बार उनके तबादले के लिए दबाव बनाया. सिंदूरी ने अदालतों और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के माध्यम से कानूनी लड़ाई लड़कर अपने प्रशासनिक अधिकारों को बरकरार रखा.
रेवन्ना ने खुले तौर पर सिंदूरी की प्रशासनिक शैली और विकासात्मक मापदंडों पर श्रेय के दावों की आलोचना की और स्थानीय शैक्षिक सुधारों (जैसे एसएसएलसी (कक्षा 10) परीक्षा उत्तीर्ण प्रतिशत) का श्रेय सिंदूरी के नेतृत्व वाले जिला प्रशासन के बजाय अपनी पत्नी भवानी रेवन्ना को दिया.
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एसएचके/पीएम