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Wednesday, 28 October 2026
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कर्नाटक में प्रदर्शन स्थलों को लेकर कार्यकर्ताओं के सुझावों पर विचार कर रही सरकार: प्रियांक खड़गे

कर्नाटक में प्रदर्शन स्थलों को लेकर कार्यकर्ताओं के सुझावों पर विचार कर रही Government: प्रियांक खड़गे

Bengaluru, 28 अक्टूबर . कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने Wednesday को कहा कि राज्य Government Bengaluru समेत अन्य क्षेत्रों में निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की संख्या बढ़ाने और कुछ स्थानों को इस सूची से हटाने के संबंध में कार्यकर्ताओं के सुझावों पर विचार कर रही है. उन्होंने कहा कि Government का उद्देश्य नागरिकों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को सीमित करना नहीं, बल्कि प्रदर्शन करने वालों और इससे प्रभावित होने वाले अन्य नागरिकों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना है.

पत्रकारों से बातचीत में खड़गे ने कहा कि Government ने कुछ कार्यकर्ताओं से मुलाकात की है. उन्होंने Bengaluru और राज्य के अन्य हिस्सों में निर्धारित प्रदर्शन स्थलों को लेकर और स्थानों पर विचार करने का सुझाव दिया है. Government इस मामले की जांच कर रही है. उन्होंने कहा कि नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं समेत सभी संबंधित पक्षों की ओर से उच्च न्यायालय में हलफनामा दाखिल किया गया है. Government इस मामले की समीक्षा करेगी.

खड़गे ने कहा, “Government नागरिकों के अधिकारों पर अंकुश लगाने में दिलचस्पी नहीं रखती. लोगों को अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने का अवसर मिलना चाहिए, लेकिन हमें उन दूसरे नागरिकों के अधिकारों का भी ध्यान रखना होगा, जो प्रदर्शनों से प्रभावित होते हैं. यह एक नाजुक संतुलन है और हम इसे बनाए रखने के लिए काम करेंगे.”

प्रदर्शन स्थलों को लेकर खड़गे की यह टिप्पणी दिल्ली में जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने पर उठे विवाद के बीच आई है. विपक्षी नेताओं ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा था कि प्रदर्शन का स्थान बदलने से लोगों का गुस्सा या विरोध की मांग खत्म नहीं होगी. खड़गे इससे पहले भी इस मुद्दे पर केंद्र Government की आलोचना कर चुके हैं. उन्होंने Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व वाली Government पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाने का आरोप लगाया था. उनका दावा था कि निर्धारित स्थल पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं देकर केंद्र Government जेन-जी आंदोलन से आशंकित है.

कर्नाटक के मंत्री ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के पक्ष में है और इससे उन लोगों के नाम मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं, जो पार्टी का विरोध करते हैं. खड़गे ने दावा किया कि राज्य में करीब एक करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूचियों से बाहर हो गए हैं. उन्होंने कहा कि कर्नाटक Government इस बात की जांच करेगी कि किन परिस्थितियों में इन लोगों के नाम सूची से हटाए गए. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से फॉर्म-7 पहले से प्रिंट कराए जाने का मामला मतदाता सूची से कुछ वर्गों को बाहर रखने की मंशा की ओर इशारा करता है.

खड़गे ने कहा, “यह एसआईआर ऐसी प्रक्रिया है, जो भाजपा के पक्ष में है. पश्चिम बंगाल में यह स्पष्ट दिखा, बिहार में भी ऐसा ही दिखा और कर्नाटक में भी. करीब एक करोड़ लोगों को बाहर कर दिया गया है.” खड़गे ने कर्नाटक के चित्तापुर विधानसभा क्षेत्र में फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाते हुए इसे चुनाव प्रक्रिया में हेरफेर की साजिश बताया. उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र में जमा किए गए 40 फॉर्म-7 आवेदन फर्जी थे. उन्होंने कहा कि इस मामले में शिकायत किसी निजी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) ने दर्ज कराई है.

खड़गे ने कहा, “यह पूरी तरह से एक साजिश है. चित्तापुर में 40 फॉर्म-7 दिए गए हैं और वे सभी फर्जी हैं. शिकायत ईआरओ ने दर्ज कराई है, किसी व्यक्ति विशेष ने नहीं.” उन्होंने आलंद का भी उल्लेख करते हुए दावा किया कि वहां जांचे गए 6,018 फॉर्म में से 5,994 फॉर्म फर्जी पाए गए. खड़गे ने यह भी कहा कि 22,000 आरोपपत्र दाखिल किए गए हैं. हालांकि, इन आरोपपत्रों से संबंधित मामलों और उनके स्वरूप का विस्तृत ब्योरा तत्काल उपलब्ध नहीं था.

मंत्री ने कहा कि राज्य Government मतदाता सूचियों की जांच करेगी और कथित तौर पर नाम हटाए जाने तथा अन्य अनियमितताओं के कारणों का पता लगाएगी. उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की प्रक्रिया विपक्ष के लिए समान अवसर के आधार पर चुनाव लड़ने की संभावनाओं को प्रभावित करती है.

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डीएससी

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