कर्नाटक ने केंद्र से मांगे 22,000 करोड़ रुपए के सूखा राहत पैकेज, किसानों को 5,000 रुपये सहायता देने का ऐलान

Bengaluru, 6 नवंबर . कर्नाटक ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) के दिशानिर्देशों के तहत केंद्र से लगभग 22,000 करोड़ रुपए की सूखा राहत की मांग की है, जबकि अनुमानित फसल क्षति 62,000 करोड़ रुपए है. यह जानकारी उपChief Minister और राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने Friday को दी.
अपने आवास के पास मीडिया को संबोधित करते हुए राजस्व मंत्री भी रहे परमेश्वर ने कहा कि राज्य Government ने केंद्र Government को तीन ज्ञापन सौंपे हैं और Prime Minister, केंद्रीय गृह मंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री से मुलाकात का समय मांगा है ताकि सूखे की स्थिति के बारे में विस्तार से बताया जा सके.
उन्होंने कहा कि यदि मुलाकात का समय दिया जाता है, तो हम सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ उनसे मिलेंगे. अन्यथा, हम Chief Minister के नेतृत्व में जाएंगे और अपना अनुरोध प्रस्तुत करेंगे.
उन्होंने आगे बताया कि राज्य ने एनडीआरएफ मानदंडों के तहत अपनी पात्र राहत आवश्यकता की गणना की थी, क्योंकि केंद्र से संपूर्ण अनुमानित नुकसान की मांग नहीं की जा सकती थी.
परमेश्वर ने कहा कि Government ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से प्रति किसान 2,500 रुपए की सूखा राहत की पहली किस्त के रूप में 1,250 करोड़ रुपए जारी किए हैं. बताया जा रहा है कि यादगिर जिले में तीन लाख से अधिक किसानों को यह सहायता प्राप्त हुई है.
केंद्र Government के दिशानिर्देशों के तहत राहत राशि में वृद्धि के बाद Chief Minister डीके शिवकुमार ने प्रति किसान 2,500 रुपए अतिरिक्त देने पर सहमति जताई थी. उन्होंने बताया कि इस अतिरिक्त सहायता के लिए 1,250 करोड़ रुपए की आवश्यकता होगी, जिसे एक सप्ताह से 15 दिनों के भीतर जारी कर दिया जाएगा, जिससे कुल राहत राशि प्रति किसान 5,000 रुपए हो जाएगी.
Government ने पेयजल व्यवस्था और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र को 1 करोड़ रुपये और जिलों को 4 करोड़ से 5 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं.
Prime Minister के साथ प्रस्तावित बैठक के बारे में परमेश्वर ने कहा कि Government ने कर्नाटक के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए अलग से समय मांगा है. प्रतिनिधिमंडल उनसे दिल्ली या मैसूरु में मिलेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उन्हें कहां मिलने का समय मिलता है.
हाल ही में परिवहन किराए और दूध एवं दही की कीमतों में हुई वृद्धि पर Government के फैसलों का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के वित्त प्रबंधन के दौरान समाज के सभी वर्गों को ध्यान में रखना आवश्यक है. उन्होंने सूखा प्रभावित किसानों, गन्ना उत्पादकों और महंगाई भत्ता प्राप्त करने वाले Governmentी कर्मचारियों की जरूरतों का हवाला दिया.
किराया वृद्धि को लेकर भाजपा की आलोचना का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों से परिवहन और कृषि लागत भी बढ़ गई है. उन्होंने दावा किया कि केंद्र में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से ईंधन की कीमतें लगभग 14 बार बढ़ाई जा चुकी हैं, और कहा कि किसान ट्रैक्टर और अन्य कृषि कार्यों के लिए डीजल पर निर्भर हैं.
उन्होंने कहा कि राज्य की राजस्व स्थिति पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर है, वाणिज्यिक करों, उत्पाद शुल्क और स्टाम्प एवं पंजीकरण शुल्कों से अच्छा संग्रह हुआ है, और Government के निर्णय उपलब्ध संसाधनों का आकलन करने के बाद ही लिए जाते हैं.
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