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Saturday, 17 October 2026
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कर्नाटक कैबिनेट ‘शुभा मर्डर केस’ के दोषियों की दया याचिकाओं पर कर सकती है चर्चा

कर्नाटक कैबिनेट ‘शुभा मर्डर केस’ के दोषियों की दया याचिकाओं पर कर सकती है चर्चा

Bengaluru, 15 अक्टूबर . कर्नाटक राज्य कैबिनेट, Bengaluru के चर्चित 2003 ‘रिंग रोड शुभा मर्डर केस’ में दोषी ठहराई गईं शुभा शंकरनारायण और उनके सह-आरोपियों द्वारा दायर दया याचिकाओं पर विचार कर सकती हैं. एक युवक की बेरहमी से हत्या के मामले में Supreme Court द्वारा उनकी उम्रकैद की सजा बरकरार रखने के बाद, उन्होंने Governor के पास दया याचिकाएं दायर की थीं. Governor कार्यालय ने इन याचिकाओं को राज्य Government के पास उनकी राय जानने के लिए भेज दिया है.

Governor कार्यालय ने ये याचिकाएं राज्य Government, विशेष रूप से गृह विभाग को भेजी हैं ताकि इन दया याचिकाओं पर उनकी राय ली जा सके.

Thursday को होने वाली कैबिनेट बैठक में इन याचिकाओं पर विचार किया जा सकता है. इसमें यह तय किया जाएगा कि इन याचिकाओं को स्वीकार करने की सिफारिश की जाए या खारिज करने की, जिसके बाद अपनी रिपोर्ट Governor को सौंप दी जाएगी.

बता दें कि यह मामला 3 दिसंबर 2003 का है, जब इंटेल में काम करने वाले 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर बी.वी. गिरीश की हत्या कर दी गई थी. यह घटना शुभा के साथ उनकी सगाई के ठीक चार दिन बाद हुई थी.

अभियोजन पक्ष के अनुसार, शुभा, गिरीश को ‘हवाई जहाज की लैंडिंग’ दिखाने के बहाने आउटर रिंग रोड इलाके में ले गई थी. आरोप है कि वहां उसके साथियों ने लोहे की रॉड से गिरीश पर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

जांचकर्ताओं ने पाया कि शुभा अपने परिवार द्वारा तय की गई इस सगाई के खिलाफ थी. उसने अरुण वर्मा और दो अन्य लोगों वेंकटेश और दिनेश के साथ मिलकर गिरीश की हत्या की साजिश रची थी.

शुभा, अरुण वर्मा, वेंकटेश और दिनेश को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 और 120-बी के तहत हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी ठहराया गया था और उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. कर्नाटक हाईकोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा था, जिसे बाद में Supreme Court ने भी सही ठहराया.

उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए, Supreme Court ने जबरन शादी से जुड़े सामाजिक और पारिवारिक दबावों को संज्ञान में लिया. साथ ही, कोर्ट ने दोषियों को अपनी गिरफ्तारी से पहले कर्नाटक के Governor के पास दया याचिकाएं दायर करने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया था.

Supreme Court के फैसले के बाद, शुभा और अन्य दोषियों ने दया याचिका के लिए Governor से संपर्क किया. अब इस प्रक्रिया के अगले चरण में इन याचिकाओं पर राज्य Government की राय एक अहम कारक साबित हो सकती है.

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एसएके/पीएम

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