
ओटावा, 10 अक्टूबर . कनाडा में अलगाववाद के बढ़ते प्रभाव को लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई है. चेतावनी भरे अंदाज में कहा गया है कि देश दूसरे देशों की संप्रभुता को नकारने वाले आंदोलनों को जगह देकर अपनी संप्रभुता की रक्षा नहीं कर सकता.
रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा सिखों की धार्मिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी और Political भागीदारी की रक्षा करते हुए भी अलगाववादी एजेंडे को वैधता देने से बच सकता है.
खालसा वॉक्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके लिए आतंकवादी संगठनों के खिलाफ घोषित प्रतिबंधों को लागू करना, एयर इंडिया विमान बम विस्फोट के दोषियों का महिमामंडन करने वाले समूहों को मंच देने से इनकार करना और किसी विदेशी जनमत संग्रह को कनाडा के परिसंघ से जुड़े मतदान के साथ एक जैसी Political अहमियत नहीं देना जरूरी है.
कुछ विज्ञापनों का भी उल्लेख करते हुए आगे कहा गया, “कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में 19 अक्टूबर को इस सवाल पर मतदान की तैयारी है कि क्या प्रांत की स्वतंत्रता के लिए बाध्यकारी जनमत संग्रह कराने की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए.” इसी बीच, एयरड्री के आसपास लगे विज्ञापन 18 अक्टूबर को एडमंटन में प्रस्तावित ‘पंजाब की स्वतंत्रता पर अल्बर्टा जनमत संग्रह’ की ओर ध्यान आकर्षित करा रहे हैं.
रिपोर्ट में इन विज्ञापनों के पीछे अमेरिका स्थित खालिस्तानी संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ (एसएफजे) का हाथ बताया गया है. इसमें कहा गया है कि इस संगठन ने सार्वजनिक रूप से अल्बर्टा के कैलगरी शहर में खालिस्तान समर्थक रैली को ‘पंजाब जनमत संग्रह और अल्बर्टा की स्वतंत्रता’, दोनों अभियानों के लिए मंच के रूप में पेश किया है. संगठन ने अल्बर्टा के लोगों को आत्मनिर्णय के अधिकार का इस्तेमाल करने देने के लिए कनाडा Government की भी सराहना की है.
अल्बर्टा की स्वतंत्रता का समर्थन करने वाले एक वक्ता ने खालिस्तान समर्थक रैली में कहा कि इस आयोजन से उन्हें अपने अभियान के लिए प्रेरणा मिलती है. रिपोर्ट में दोनों आयोजनों की तारीखों के बीच एक दिन का अंतर होने को जानबूझकर अपनाई गई रणनीति बताया गया है.
खालसा वॉक्स की रिपोर्ट में कहा गया, “एसएफजे के जनमत संग्रह अनौपचारिक और गैर-बाध्यकारी हैं तथा India Government के लिए उनका कोई कानूनी महत्व नहीं है. कनाडा के लिए इनके Political और सामाजिक प्रभावों को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा. यह आंदोलन पिछले चार दशकों से कनाडा की सड़कों और गुरुद्वारों का इस्तेमाल करते हुए India के क्षेत्र से जुड़े अलगाववादी दावे को आगे बढ़ाता रहा है. अब अल्बर्टा में कनाडा की एकता से जुड़े महत्वपूर्ण मतदान के साथ इस मुद्दे को जोड़ने की कोशिश की जा रही है.”
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई, “अलगाववादी आंदोलन केवल उन देशों या समुदायों के लिए खतरा नहीं होते, जिन्हें वे सीधे निशाना बनाते हैं, बल्कि उस देश की संप्रभुता को भी चुनौती दे सकते हैं जहां उन्हें गतिविधियां चलाने की जगह मिलती है.”
इसमें कहा गया है कि ऐसे आंदोलन राष्ट्रीय सीमाओं को स्थायी मानने के बजाय उन्हें Political अभियान का विषय बनाने की सोच को बढ़ावा देते हैं. इसके अलावा, वे विदेशी देशों के बीच खुफिया और Political प्रतिद्वंद्विता को घरेलू सुरक्षा व्यवस्था में ला सकते हैं तथा अपने ही समुदाय के असहमत लोगों को डराने-धमकाने का कारण बन सकते हैं.
रिपोर्ट में अल्बर्टा के प्रस्तावित मतदान और एडमंटन में होने वाले खालिस्तान समर्थक आयोजन के बीच अंतर भी स्पष्ट किया गया है. इसके अनुसार, ठ19 अक्टूबर का मतदान कनाडा के कानूनों के तहत अल्बर्टा के मतदाताओं के लिए अपनी संवैधानिक स्थिति पर विचार करने की प्रक्रिया का हिस्सा है, जबकि उससे एक दिन पहले प्रस्तावित पंजाब जनमत संग्रह का उद्देश्य एक विदेशी क्षेत्रीय दावे को वैधता दिलाने के लिए इस Political घटनाक्रम का लाभ उठाना है.”
–
केआर/