एथेंस ओलंपिक में सत्यदेव प्रकाश के निशाने ने भारतीय तीरंदाजी को दी वैश्विक पहचान

New Delhi, 18 सितंबर . तीरंदाजी India की एक प्राचीन कला है. इसका इस्तेमाल युद्ध में होता था. अब तीरंदाजी वैश्विक स्तर पर एक लोकप्रिय खेल के रूप में प्रतिष्ठित है. मौजूदा समय में भारतीय तीरंदाज भी वैश्विक मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व करते हैं. सत्यदेव प्रसाद का नाम उन तीरंदाजों में लिया जाता हैं जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से अन्य तीरंदाजों के लिए रास्ता खोला.

सत्यदेव प्रसाद का जन्म निजामाबाद, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश में 1979 में हुआ था. बहुत कम उम्र में तीरंदाजी की शुरुआत करने वाले सत्यदेव को इस खेल में अपना नाम बनाने और तीरंदाज के रूप में खुद को स्थापित करने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा. शुरुआती दिनों में उनके पास न तो कोई अत्याधुनिक उपकरण थे और न ही प्रशिक्षण की व्यवस्था. लेकिन, अभावों ने सत्यदेव के संकल्प को और मजबूत किया और इस खेल में शीर्ष पर जाने के लिए प्रेरित किया.

उन्होंने लकड़ी के धनुष और साधारण तीरों से अभ्यास शुरू किया और स्थानीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने लगे. अपने बेहतर प्रदर्शन की वजह से जल्द ही उन्होंने कोचों और चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी तरफ खींचा. उन्हें राष्ट्रीय स्तर के कैंप में बुलाया गया. कैंप में न सिर्फ उनकी प्रतिभा को पहचान मिली, बल्कि बेहतर प्रशिक्षण का अवसर मिला. कड़ी मेहनत और बेहतर करने की लगन ने जल्द ही सत्यदेव प्रसाद को राष्ट्रीय टीम का अहम हिस्सा बना दिया.

सत्यदेव प्रसाद ने मलेशिया में आयोजित एशियाई टीम चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता था. रोम विश्व चैम्पियनशिप 1999, बीजिंग विश्व चैम्पियनशिप 2001 और न्यूयॉर्क विश्व चैम्पियनशिप 2003 में उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व किया.

प्रसाद ने एथेंस ओलंपिक 2004 में व्यक्तिगत तीरंदाजी में हिस्सा लिया था. उन्होंने अपना पहला मैच जीता और राउंड 32 में आगे बढ़े. एलिमिनेशन के दूसरे राउंड में, वह फिर से विजयी रहे और राउंड 16 में पहुंचे. तीसरे मैच में उन्हें दक्षिण कोरिया के प्रथम रैंक वाले इम डोंग-ह्यून से हार का सामना करना पड़ा. वह दसवें स्थान पर रहे थे. प्रसाद बेशक पदक नहीं जीत पाए, लेकिन ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर भारतीय तीरंदाजी के लिए यह अहम क्षण था. भारतीय तीरंदाजी की ताकत को दुनिया ने पहचाना. प्रसाद के इस प्रदर्शन ने देश में युवाओं को तीरंदाजी को गंभीरता से लेने के लिए प्रेरित किया.

2018 में सत्यदेव प्रसाद को ध्यानचंद पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

पीएके

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