उत्तर प्रदेश में भी यूसीसी लागू करने की कवायद अच्छी बात: मनु गौड़

देहरादून, 30 अक्टूबर . उत्तर प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर उत्तराखंड यूसीसी ड्राफ्ट कमेटी के सदस्य मनु गौड़ ने खुशी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी यूसीसी लागू करने की दिशा में पहल होना अच्छी बात है.
से बातचीत में मनु गौड़ ने कहा कि यह गर्व की बात है कि उत्तराखंड में यूसीसी लागू हुए करीब पौने दो साल हो चुके हैं. अब देश के अन्य राज्य भी इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने बताया कि Gujarat में भी यूसीसी को President की मंजूरी मिल चुकी है और नियम तैयार होने के बाद इसे लागू किया जाएगा. ऐसे में उत्तर प्रदेश में भी यूसीसी लागू करने की कवायद शुरू होना सकारात्मक कदम है.
मनु गौड़ ने ने कहा कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच पुराने सामाजिक और पारिवारिक संबंध हैं. राज्य गठन के बाद भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई लोग उत्तराखंड में रहते हैं. ऐसे अनेक परिवारों के दोनों राज्यों में आवास हैं और कुछ लोग दोनों जगह मतदाता सूची में भी शामिल रहे हैं. उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के माध्यम से दोहरी प्रविष्टियों वाले मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश में भी यूसीसी लागू हो जाता है, तो दोनों राज्यों में रहने वाले लोगों को समान कानूनी व्यवस्था का लाभ मिल सकेगा. उत्तराखंड में यूसीसी के तहत बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाया गया है. पहले कुछ लोग उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश, दोनों राज्यों से जुड़े होने के कारण अलग-अलग कानूनों का लाभ लेने की कोशिश कर सकते थे. दोनों राज्यों में समान नियम लागू होने से ऐसी स्थितियों को रोकने में मदद मिलेगी.
मनु गौड़ ने कहा कि उत्तर प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में भी उत्तराखंड की व्यवस्था से सीख लेनी चाहिए. उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा बोर्ड को समाप्त कर नई शिक्षा नीति के अनुरूप व्यवस्था लागू की गई है. इसका उद्देश्य मुस्लिम समाज के बच्चों को आधुनिक शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे भी डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस और आईपीएस जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ सकें.
उन्होंने कहा कि देश में पंजीकृत मदरसों की बड़ी संख्या उत्तर प्रदेश में है. जिस तरह उत्तर प्रदेश यूसीसी के मामले में उत्तराखंड की तर्ज पर आगे बढ़ने की दिशा में विचार कर रहा है, उसी तरह मदरसा शिक्षा व्यवस्था में भी उत्तराखंड के मॉडल पर विचार किया जाना चाहिए.
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डीकेएम/वीसी


