
उज्जैन, 9 सितंबर . उज्जैन के रामघाट पर होने वाली पारंपरिक ‘मां शिप्रा आरती’ को लेकर तीर्थ पुरोहितों और प्रशासन के बीच विवाद सामने आया है. अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा से जुड़े नेताओं और पुजारियों ने आरती की व्यवस्था में प्रशासनिक दखल का विरोध करते हुए पुरानी परंपरा को जारी रखने की मांग की. पुरोहितों ने मांग पूरी नहीं होने पर देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है. साथ ही इंदौर हाई कोर्ट से मामले में हस्तक्षेप कर रोक लगाने की मांग की गई है.
अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित रामकृष्ण तिवारी ने कहा कि रामघाट पर आरती तीर्थ पुरोहितों की धार्मिक परंपरा का हिस्सा रही है. लेकिन, नई टेंडरिंग व्यवस्था के जरिए प्रशासन आरती कराने की तैयारी कर रहा है, जिससे पारंपरिक रूप से आरती करने वाले तीर्थ पुरोहितों को हटाए जाने की आशंका है. इस व्यवस्था को महासभा स्वीकार नहीं करेगी. उन्होंने प्रशासन से पुरानी व्यवस्था बहाल करने और तीर्थ पुरोहितों के सम्मान व हितों का ध्यान रखने की अपील की. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पुरोहितों के हितों के साथ कथित तौर पर खिलवाड़ जारी रहा तो आंदोलन को व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा.
उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन पूरे देश में किया जाएगा और अंतिम चरण में केंद्र Government के समक्ष भी मामला उठाया जाएगा. इसके तहत दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी गई.
अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा युवा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद ने कहा कि उज्जैन का पंडा समाज और क्षेत्र की पंडा समिति लंबे समय से मां शिप्रा की आरती की परंपरा निभाते आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह परंपरा पांच-दस साल पुरानी नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही है. जब किसी धार्मिक परंपरा का लंबे समय से पालन हो रहा है तो उसे बदला क्यों जाए. Government विकास से जुड़े जितने भी काम करना चाहती है, तीर्थ पुरोहित उनका सहयोग करेंगे, लेकिन विकास के नाम पर पंडा समाज और पुजारियों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए.
उन्होंने आगे कहा कि पुरोहितों के साथ न्यायपूर्ण व्यवस्था होनी चाहिए और उनकी धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए.
पुरोहित महासभा के नेताओं ने कहा कि उनका विरोध विकास कार्यों के खिलाफ नहीं है, बल्कि धार्मिक परंपरा और उससे जुड़े पुरोहितों की भूमिका को बनाए रखने को लेकर है. उन्होंने प्रशासन से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है. साथ ही मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन को उज्जैन से बाहर देशव्यापी स्तर तक ले जाने की चेतावनी दी है.
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पीएसके