
अयोध्या, 13 सितंबर . महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय, अयोध्या ने ईरान-इजरायल विवाद जैसे वैश्विक मुद्दे पर देश की पहली राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित कर एक नई पहल की है. आईसीएसएसआर के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी में ईरान-इजरायल संघर्ष का India पर पड़ने वाले प्रभाव और India की कूटनीतिक नीति पर मंथन किया गया. संगोष्ठी में 100 से अधिक पीएचडी स्कॉलर्स और 30 से ज्यादा छात्रों ने ऑनलाइन-ऑफलाइन अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए.
रामायण विश्वविद्यालय के कुलपति भानु प्रताप सिंह ने कहा, “इजरायल और ईरान के बीच चल रहे विवाद का India पर क्या प्रभाव पड़ेगा और इसको लेकर India की नीति क्या होनी चाहिए, इसी विषय पर हमने दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया.”
उन्होंने कहा कि 100 से अधिक पीएचडी स्कॉलर्स ने संगोष्ठी में अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए, जबकि करीब 30 से ज्यादा छात्रों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से पेपर प्रेजेंट किए. यह दो दिवसीय संगोष्ठी ऑनलाइन आयोजित की गई थी, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने अपने विचार रखे. संगोष्ठी से जो निष्कर्ष निकलेंगे, उन्हें उचित माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा.
डॉ. गौरव ने कहा कि यह दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आईसीएसएसआर से प्राप्त ग्रांट के तहत आयोजित हो रही है, जिसका विषय ईरान-इजरायल विवाद है. यह महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय, अयोध्या की ओर से आयोजित की जा रही है और यह न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे India का पहला विश्वविद्यालय है, जिसने ईरान-इजरायल मुद्दे पर इस तरह की पहली राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया.
उन्होंने कहा कि महर्षि हमेशा देश को शांति का संदेश देते थे, इसलिए विश्वविद्यालय ने यह पहल की है. India हमेशा से शांति की बात करता आया है और इस संघर्ष से कहीं न कहीं देश का हर नागरिक प्रभावित हो रहा है. इस दो दिवसीय सेमिनार में चार सत्र आयोजित हुए हैं और हर सत्र में एक सब्जेक्ट एक्सपर्ट और एक अध्यक्ष मौजूद रहे. आज के सत्र की अध्यक्षता करुणाशंकर उपाध्याय और डॉ. नीला तिवारी ने की.
डॉ. स्वाति सिंह ने कहा कि हम महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय से हैं और हमारा विश्वविद्यालय महर्षि के बताए मार्ग पर चलता है, जिसका मूल उद्देश्य शांति है. इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए हमने ईरान-इजरायल विवाद पर संगोष्ठी आयोजित की है.
उन्होंने कहा कि India इस विवाद में संतुलन बनाए रखना चाहता है. ईरान के साथ हमारे ऐतिहासिक संबंध हैं, वहीं इजरायल के साथ हमारी कई रणनीतिक साझेदारियां हैं. India अपनी जरूरत का करीब 80 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए यह एक भू-Political संकट है जिसका असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.
डॉ. स्वाति सिंह ने कहा कि अगर यह लड़ाई जारी रही और शांति स्थापित नहीं हुई तो इसका असर सिर्फ India ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर दिखेगा. कच्चे तेल के दाम बढ़ेंगे, महंगाई बढ़ेगी और वैश्विक व्यापार संतुलन बिगड़ेगा. इसे नियंत्रित करना जरूरी है क्योंकि किसी भी समस्या का समाधान युद्ध नहीं है, बल्कि शांति से ही इसे खत्म किया जा सकता है. हमारा उद्देश्य यही होना चाहिए कि जल्द से जल्द इस युद्ध को समाप्त किया जाए ताकि विश्व अर्थव्यवस्था फिर से नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ सके.
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केके/डीकेपी