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Sunday, 18 October 2026
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ईडी के समन के बाद नए रिकॉर्ड से जुड़े पिनाराई विजयन, सीपीआई(एम) में पहली बार पोलित ब्यूरो सदस्य को नोटिस

ईडी के समन के बाद नए रिकॉर्ड से जुड़े पिनाराई विजयन, सीपीआई(एम) में पहली बार पोलित ब्यूरो सदस्य को नोटिस

तिरुवनंतपुरम, 16 अक्टूबर . सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेता और केरल के पूर्व Chief Minister पिनाराई विजयन के नाम अब एक और रिकॉर्ड जुड़ गया है.

वे सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो के ऐसे पहले सदस्य बन गए हैं जिन्हें Enforcement Directorate (ईडी) ने समन भेजा है. उन्हें ‘मसाप्पाडी’ (सीएमआरएल-एक्सलॉजिक) मामले के सिलसिले में Friday को ईडी अधिकारियों के सामने पेश होने के लिए कहा गया है.

विजयन के लिए Political रिकॉर्ड कोई नई बात नहीं है. उन्होंने 1998 से 2015 तक सीपीआई (एम) के राज्य सचिव के रूप में काम किया और फिर 2016 से 2026 तक लगातार दो कार्यकाल के लिए Chief Minister रहे. केरल का कोई अन्य Chief Minister लगातार दो पूरे कार्यकाल पूरे नहीं कर पाया है.

अब, ईडी के समन ने उनके Political करियर में एक बिल्कुल अलग तरह की पहचान जोड़ दी है. इस विडंबना को नजरअंदाज करना मुश्किल है.

सीपीआई (एम) ने अपनी Political पहचान का एक बड़ा हिस्सा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने और सत्ता में बैठे लोगों से जवाबदेही मांगने के इर्द-गिर्द बनाया है.

2015 में, पार्टी ने ‘बार रिश्वत मामले’ को लेकर तत्कालीन वित्त मंत्री केएम मणि के खिलाफ जोरदार अभियान चलाया. हाई कोर्ट के एक जज की तीखी टिप्पणियों के बाद, उन्हें अंततः इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा.

‘सोलर स्कैम’ विवाद के दौरान, तत्कालीन Chief Minister ओमन चांडी (2011-16) के सबसे मुखर आलोचकों में खुद विजयन भी शामिल थे. उन्होंने बार-बार चांडी के इस्तीफे की मांग की, और कई बार तो ऐसी तीखी भाषा का इस्तेमाल किया जो संसदीय शिष्टाचार की सीमाओं से कहीं बाहर थी. बाद में, चांडी को इन आरोपों से बरी कर दिया गया.

आज सारा ध्यान विजयन पर आ गया है. उन पर आरोप है कि कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) ने ‘एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस’ को कुछ भुगतान किए थे, और यह कंपनी उनकी बेटी टी. वीना से जुड़ी हुई है. इन लेन-देन के सिलसिले में दो मामले दर्ज किए गए हैं.

दोनों ही मामलों में वीना दूसरी आरोपी हैं, जबकि उनके पति और सीपीआई (एम) विधायक पीए मोहम्मद रियास हवाला से जुड़े एक अलग मामले में पहले आरोपी हैं. सीपीआई (एम) का हमेशा से यही बचाव रहा है कि ईडी का इस्तेमाल Political विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है. हो सकता है कि यह तर्क पार्टी की Political प्रतिक्रिया का हिस्सा हो, लेकिन इससे समन (बुलावा) खत्म नहीं हो जाता.

अगर किसी और Political दल के नेता के साथ ऐसा कुछ हुआ होता, तो शायद सीपीआई (एम) ने तुरंत इस्तीफे की मांग की होती. हालांकि, विजयन के मामले में पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें विपक्ष के नेता के पद से इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है.

ओमन चांडी ने एक बार कहा था कि केरल की राजनीति में अक्सर यह मायने नहीं रखता कि क्या काम किया गया है, बल्कि यह मायने रखता है कि वह काम किसने किया है.

मौजूदा विवाद इस बात की एक नई परीक्षा पेश करता है. जो पार्टी लंबे समय से दूसरों से जवाबदेही की मांग करती रही है, उसके सामने अब सवाल यह है कि क्या यही पैमाना उसके अपने घर (पार्टी) पर भी लागू होता है.

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एएसएच/डीकेपी

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