इस बार उत्तर प्रदेश में भाजपा की विदाई होगी : सुप्रिया श्रीनेत

New Delhi, 25 अगस्त . कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने जाति जनगणना, कंगना रनौत की टिप्पणी, स्कूल फंडिंग और उत्तर प्रदेश के Political घटनाक्रम जैसे मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने से बात करते हुए Tuesday को कहा कि जब राहुल गांधी ने जन आंदोलन चलाया, तब उन्होंने कहा था कि जातिगत सर्वे होना चाहिए. देश में सामाजिक-आर्थिक और जाति सर्वे होना चाहिए.

सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि Government जाति जनगणना के पीछे षड्यंत्र कर रही है. यह षड्यंत्र पिछड़े, अति-पिछड़े और वंचितों के खिलाफ हो रहा है. इस सर्वे में एक ओपन-एंडेड सवाल पूछा जा रहा है कि आपकी जाति क्या है. देश में एक ही जाति को अलग-अलग जगहों पर विभिन्न नामों और भाषा से जाना जाता है. ऐसे में एक जाति की संख्या का पता लगाना मुश्किल है. मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने जो जातिगत सर्वे को लेकर पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी है, उस पर उनको ध्यान देना चाहिए. देश में जातिगत सर्वे ऐसा होना चाहिए, जिससे पिछड़ों, अति-पिछड़ों, आदिवासियों और दलितों का भला हो.

सुप्रिया श्रीनेत ने कंगना रनौत की टिप्पणी पर अपनी बात रखते हुए कहा कि जब आप जनता द्वारा चुने जाने के बाद सांसद बनते हैं, तब आप देश के जरूरी मुद्दों पर बात करें. कभी आप खड़ी होकर देश के वर्तमान और भविष्य के होनहार युवाओं को जेनरेशन गटर कहती हैं. आपने किसानों को क्या-क्या कहा, वह सबको पता है. अब आपको यह दिक्कत है कि आपके साथ की जो एक्ट्रेस हैं, वह क्या पहनें और क्या न पहनें. यह कितनी पितृसत्ता वाली मानसिकता है.

उन्होंने कहा कि आप एक युवा Actress के पहनावे पर टिप्पणी एक सांसद होकर कर रही हैं. इसी पितृसत्ता वाली सोच को खत्म करने की बात राहुल गांधी करते हैं. यह जो सोच है कि लड़की ने क्या पहना है, वह किससे बात करती है, कहां जाती है, किससे शादी करती है, किससे संबंध है, कैसे चलती है… इस पर जो टिप्पणी होती है, यही पितृसत्ता वाली सोच को दर्शाती है. यह देख कर दुख होता है कि एक महिला जो बड़ी सशक्त है, जिसने फिल्मी जगत में अपना नाम कमाया और अब सांसद बनीं है, वह अभिनेत्रियों के बारे में ऐसी टिप्पणी करती है.

उन्होंने आगे कहा कि धार्मिक आस्था अपनी जगह है. उस पर भी खर्चा होना चाहिए, लेकिन यह भी हकीकत है कि Governmentी स्कूलों का बंद होना, Governmentी स्कूलों का जर्जर होना, Governmentी स्कूलों की इमारतों का गिरना, बच्चों का खुले में बैठकर पढ़ना, करीब-करीब 1.5 लाख Governmentी स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय नहीं है. वहीं, लगभग 90 हजार ऐसे स्कूल हैं, जो एक कमरे में मात्र एक शिक्षक द्वारा संचालित किए जा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि जिस India को पढ़ने की जरूरत है, जिसके बलबूते देश आगे बढ़ेगा. ऐसे में अगर Government शिक्षा पर ही ध्यान नहीं देगी, तो क्या होगा? जेनजी के बाद आगे मैदान में जेन-अल्फा आ जाएगी, जो सवाल उठाएगी कि हमारे स्कूल में पंखे नहीं हैं, हमारे लिए खेल-कूद की व्यवस्था करिए, सड़कें बनाइए. Governmentों को यह सोचना चाहिए कि उनकी प्राथमिकता क्या है. क्या शिक्षा और स्वास्थ्य आपकी प्राथमिकता नहीं है?

उन्होंने यूपी चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि जो मुकाबला है, वह उत्तर प्रदेश की जनता और भाजपा के बीच है. उन्होंने कहा कि लोगों ने इस बार मन बना लिया है कि यूपी में बीजेपी की विदाई होगी.

डीके/एबीएम

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