इंडिया ब्लॉक का Supreme Court मार्च ‘असंवैधानिक’, ‘अवैध’ और ‘लोकतंत्र विरोधी’: बसवराज बोम्मई

Bengaluru, 12 अक्टूबर . सांसद बसवराज बोम्मई ने Monday को कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों द्वारा Supreme Court पर अनावश्यक दबाव डालने के लिए किया गया मार्च पूरी तरह से ‘असंवैधानिक’, ‘अवैध’ और ‘लोकतंत्र विरोधी’ है.

एक प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयोग (सीईसी) और एसआईआर से संबंधित मामलों की सुनवाई पहले से ही Supreme Court में चल रही है.

उन्होंने चिंता व्यक्त की कि देश में अराजकता पैदा करने के Political रूप से प्रेरित और दुर्भावनापूर्ण इरादों से Supreme Court पर दबाव डालना भविष्य में Supreme Court के खिलाफ विद्रोह भड़काने की दिशा में पहला कदम प्रतीत होता है.

उन्होंने इस बात पर गहरा खेद व्यक्त किया कि लगभग 60 वर्षों तक सत्ता में रही कांग्रेस पार्टी इस हद तक गिर गई है. उन्होंने India के सभी नागरिकों से पूरी ताकत से इसका कड़ा विरोध करने की अपील की.

बोम्मई ने आगे कहा कि कर्नाटक राज्य Government को अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति आरक्षण में बढ़ोतरी को रद्द करने वाले कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर करनी चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि Government ऐसा करने में विफल रहती है, तो वे स्वयं इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय में ले जाएंगे.

उन्होंने कहा कि जब उनकी Government ने आरक्षण बढ़ाया था, तो यह न्यायमूर्ति नागमोहन दास समिति की रिपोर्ट के आधार पर और राज्य विधानसभा के दोनों सदनों में कानून पारित करने के बाद किया गया था.

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून इसलिए लागू किया गया था क्योंकि संविधान अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों को उनकी जनसंख्या के आधार पर आरक्षण प्रदान करने की अनुमति देता है.

उन्होंने आगे कहा कि जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करने वालों ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के विकास के विरोध में ऐसा किया है. राज्य Government को निश्चित रूप से इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय में ले जाना चाहिए.

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एमएस/

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