आंध्र प्रदेश के सात लापता मछुआरे 25 दिन बाद सुरक्षित घर लौटे

अमरावती, 28 अगस्त . आंध्र प्रदेश के सात मछुआरे इस महीने समुद्र में लापता हो गए थे, जिसके बाद वो Friday को सुरक्षित घर लौट आए हैं.

ये मछुआरे डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनासीमा जिले के हैं. जो 3 अगस्त को मछली पकड़ने के लिए समुद्र में गए थे और बाद में लापता हो गए थे. अब ये सभी मछुआरे काकीनाडा पहुंच गए हैं.

पश्चिम बंगाल तट के पास शंकरपुर मछली पकड़ने के बंदरगाह के नजदीक Wednesday को सुरक्षित पाए गए मछुआरों का 25 दिनों के बाद अपने परिवार से मिलना हो पाया.

अधिकारियों ने मछुआरों को पश्चिम बंगाल से वापस यहां लाने में मदद की. विधायक वी. कोंडाबाबू, एमएलसी राजशेखर और जिला अधिकारियों ने मछुआरों का स्वागत किया.

मछुआरे 3 अगस्त को ओडलरेवु मछली उतारने के स्थान से एक मशीनीकृत नाव पर सवार होकर रवाना हुए. टूना मछली की तलाश में आंध्र तट से दूर गहरे समुद्र में मछली पकड़ने जाने के चार दिन बाद उनका अपने परिवारों से संपर्क टूट गया.

मछुआरों को 12 अगस्त को वापस लौटना था और जब वे वापस नहीं लौटे, तो परिवार चिंतित हो गए और उन्होंने अधिकारियों से संपर्क किया.

Tuesday को 15 तटरक्षक जहाजों और चार हेलीकॉप्टरों की तैनाती के साथ तलाशी अभियान को तेज कर दिया गया.

केंद्र Government के सहयोग से भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी), नौसेना और अन्य संबंधित विभागों के समन्वय से एक व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया. Wednesday दोपहर को पश्चिम बंगाल तट के पास शंकरपुर मछली पकड़ने के बंदरगाह के नजदीक स्थानीय मछुआरों ने लापता मछुआरों से भरी नाव को ढूंढ निकाला.

उन्होंने लापता मछुआरों को एक मोबाइल फोन दिया, जिसकी मदद से उन्होंने आंध्र प्रदेश में अपने परिवार के सदस्यों से बात की और पुष्टि की कि वे सुरक्षित हैं.

मछुआरों ने बताया कि नाव के इंजन में तकनीकी खराबी आने के बाद वे समुद्र में फंस गए थे. लापता नाव पर सवार मछुआरों की पहचान कोपानाथी रामकृष्ण, कोल्लाती येसुदासु, पालेपु सांता राव, कोल्लाती श्रीनुबाबू, कर्री रामबाबू, संगानी टाटाराव और काटादी सतीश कुमार के रूप में की गई.

मछुआरों ने बताया कि पश्चिम बंगाल के तट पर पहुंचने से पहले वे समुद्र में तीन दिनों से अधिक समय तक बिना भोजन के जीवित रहे.

एसएचके/पीएम

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