असम में भारत की दूसरी सबसे अधिक हाथियों की आबादी: हिमंता बिस्वा सरमा

गुवाहाटी, 8 अक्टूबर . असम के Chief Minister हिमंता बिस्वा सरमा ने Thursday को कहा कि देश में हाथियों की संख्या के मामले में असम दूसरे स्थान पर है और राज्य के जंगलों में 5,800 से ज्यादा हाथी रहते हैं.

social media प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में सीएम सरमा ने असम की समृद्ध वन्यजीव विरासत और देश की हाथियों की आबादी के लिए एक महत्वपूर्ण आवास के रूप में इसके महत्व पर प्रकाश डाला.

Chief Minister ने कहा कि असम हाथियों की संख्या के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है. राज्य के जंगलों में 5,800 से अधिक हाथी घूमते हैं.

असम की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान का जिक्र करते हुए सीएम सरमा ने कहा कि प्रतिष्ठित कामाख्या मंदिर से जुड़े राज्य में हाथियों की बड़ी आबादी की मौजूदगी विशेष रूप से प्रतीकात्मक है.

उन्होंने भगवान गणेश का जिक्र करते हुए कहा, “जहां मां कामाख्या निवास करती हैं, वहां भगवान गजानन का भी मौजूद रहना स्वाभाविक है.” भगवान गणेश को पारंपरिक रूप से हाथी के सिर के साथ चित्रित किया गया है.

असम अपने घने जंगलों, जैव-विविधता और तरह-तरह के वन्यजीवों के लिए जाना जाता है और हाथी इसके प्राकृतिक इकोसिस्टम का एक अहम हिस्सा हैं. राज्य के जंगल और संरक्षित इलाके एशियाई हाथियों के लिए जरूरी आवास हैं और राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर संरक्षण के लिहाज से अहम कई अन्य प्रजातियों को भी सहारा देते हैं.

हाथियों की आबादी इकोलॉजिकल संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाती है, क्योंकि ये जानवर बीजों को फैलाने में मदद करते हैं और जंगल के इकोसिस्टम की बनावट और उसके दोबारा पनपने की प्रक्रिया पर असर डालते हैं.

हालांकि, असम के कुछ इलाकों में इंसानी बस्तियों के पास हाथियों की मौजूदगी एक चुनौती भी रही है, जहां समय-समय पर इंसान और हाथी के बीच टकराव की वजह से जान-माल का नुकसान और फसलों व संपत्ति की बर्बादी होती रही है.

इसलिए, राज्य में संरक्षण के प्रयासों का मुख्य फोकस हाथियों के रहने की जगहों को बचाने, जंगल के रास्तों (कॉरिडोर) को बनाए रखने और समुदायों व जंगली जानवरों के बीच टकराव को कम करने पर रहा है.

Chief Minister का यह बयान ऐसे समय में आया है जब असम Government राज्य की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को अपनी पहचान के एक अहम हिस्से के तौर पर लगातार उजागर कर रही है.

5,800 से ज्यादा हाथियों के साथ, असम देश में हाथियों के रहने की प्रमुख जगहों में से एक बना हुआ है और India के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों में अहम योगदान देता है. राज्य की समृद्ध जैव-विविधता और उसकी गहरी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराएं मिलकर वन्यजीव संरक्षण को असम की पर्यावरणीय पहचान का एक अहम हिस्सा बनाती हैं.

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पीएसके

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