अयोध्या में त्रेतायुग की जीवंत हुईं स्मृतियां, पुष्पक विमान से पहुंचे प्रभु श्रीराम, सीएम योगी ने रथ खींचकर किया स्वागत

अयोध्या, 7 नवंबर . रामनगरी अयोध्या में 10वें दीपोत्सव के अवसर पर Saturday को त्रेतायुग की स्मृतियां जीवंत हो उठीं. पुष्पक विमान के प्रतीक हेलीकॉप्टर से भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान के स्वरूप रामकथा पार्क के निकट बने अस्थायी हेलीपैड पर उतरे तो पूरा परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा. रामायण के प्रसंगों पर आधारित भव्य झांकियों, पारंपरिक लोकनृत्यों और ढोल-नगाड़ों की गूंज ने रामनगरी को भक्तिमय बना दिया.
दीपोत्सव के मुख्य कार्यक्रम में उपPresident सीपी राधाकृष्णन और Governor आनंदीबेन पटेल भी शामिल हुए. रामकथा पार्क पहुंचने पर उनका स्वागत किया गया. इस दौरान Chief Minister योगी आदित्यनाथ, उप Chief Minister ब्रजेश पाठक और मंत्रिमंडल के अन्य सहयोगी मौजूद रहे.
कार्यक्रम में गुरु वशिष्ठ की भूमिका निभा रहे Chief Minister योगी आदित्यनाथ ने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ भगवान श्रीराम और माता सीता के स्वरूपों की अगवानी की. इसके बाद उन्होंने राम और सीता के स्वरूपों की पूजा-अर्चना कर आरती उतारी. धार्मिक परंपरा के अनुरूप भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण को रथ पर विराजमान कराया गया.
Chief Minister योगी आदित्यनाथ और उप Chief Minister ब्रजेश पाठक ने स्वयं प्रतीकात्मक रूप से रथ खींचकर प्रभु का स्वागत किया. इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो उठे. इससे पहले साकेत महाविद्यालय से पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने भव्य शोभायात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.
करीब तीन किलोमीटर का सफर तय कर शोभायात्रा रामकथा पार्क पहुंची. इसमें 21 आकर्षक झांकियां शामिल रहीं. इनमें सात झांकियां रामायण के सातों कांडों पर आधारित थीं, जबकि 14 झांकियों के माध्यम से केंद्र और प्रदेश Government की विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रदर्शित किया गया.
रामायण आधारित झांकियों में बालकांड से लेकर उत्तरकांड तक की कथा को बेहद आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया. कहीं भगवान श्रीराम के जन्म और बाल लीलाओं के दृश्य दिखाई दिए तो कहीं वनगमन, वनवास और ऋषि-मुनियों के आश्रमों से जुड़े प्रसंगों का मंचन हुआ. किष्किंधाकांड में सुग्रीव और हनुमान से मिलन, सुंदरकांड में बजरंगबली के पराक्रम तथा लंकाकांड में रावण के साथ युद्ध के दृश्य दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहे.
इन झांकियों के जरिए श्रद्धालुओं को रामायण की संपूर्ण गाथा का सजीव दर्शन कराया गया. शोभायात्रा के दौरान रामपथ पर लोकसंस्कृति और परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला. महिला कलाकार कंधों पर ढोल रखकर पारंपरिक धुनों पर थाप देती नजर आईं.
ढोल, नगाड़ों और ताशों की गूंज के बीच लोक कलाकारों के नृत्य और करतबों ने उत्सव की भव्यता को और बढ़ा दिया. विभिन्न राज्यों के लोकनृत्यों ने भी लोगों का ध्यान खींचा. रथों पर सजी झांकियों के आगे बढ़ने के साथ ही पूरा मार्ग जय श्रीराम के जयघोष से गुंजायमान रहा.
रामपथ पर उमड़ी भीड़ में श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत नजारा दिखाई दिया. श्रद्धालु जगह-जगह रुककर झांकियों को निहारते और कलाकारों का उत्साहवर्धन करते रहे. दसवें दीपोत्सव की शोभायात्रा में जहां रामायण के प्रसंगों के जरिए प्राचीन भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की झलक मिली, वहीं दूसरी ओर Governmentी योजनाओं पर आधारित झांकियों ने आधुनिक अयोध्या और प्रदेश के विकास की तस्वीर भी प्रस्तुत की.
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विकेटी/एएसएच


