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Monday, 19 October 2026
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अमेरिका ने भारत-चीन पर रूसी ऊर्जा खरीद को लेकर टैरिफ के लिए यूरोप से समर्थन मांगा, लेकिन सहयोग नहीं मिला : बेसेंट

अमेरिका ने भारत चीन पर रूसी ऊर्जा खरीद को लेकर टैरिफ के लिए यूरोप से समर्थन मांगा, लेकिन सहयोग नहीं मिला : बेसेंट

अमेरिका ने भारत-चीन पर रूसी ऊर्जा खरीद को लेकर टैरिफ के लिए यूरोप से समर्थन मांगा, लेकिन सहयोग नहीं मिला : बेसेंट

वाशिंगटन, 19 अक्टूबर . अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि अमेरिका ने रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों, खासकर India और चीन, पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने के लिए यूरोपीय देशों से समर्थन मांगा था, लेकिन यूरोप ने इस कदम का साथ नहीं दिया.

Sunday को एक इंटरव्यू में बेसेंट ने ट्रंप प्रशासन के उस फैसले का बचाव किया, जिसमें रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर नए प्रतिबंधों को फिलहाल लागू करने से रोक दिया गया है.

दूसरी ओर, अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि नए प्रतिबंध कानून के तहत सबसे अधिक प्रभावित होने वाले दो देश, India और चीन, हो सकते हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि President डोनाल्ड ट्रंप ने भविष्य में इन प्रतिबंधों को लागू करने का अधिकार अपने पास रखा है.

दोनों वरिष्ठ मंत्रियों की टिप्पणियों से रूस के ऊर्जा व्यापार को लेकर अमेरिका की रणनीति और यूरोपीय देशों के साथ उसके समन्वय की कोशिशों पर नई जानकारी सामने आई है.

एनबीसी के कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस’ में बेसेंट ने कहा कि यूरोपीय देश अब भी रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीद रहे हैं, जबकि वे India और चीन पर प्रस्तावित अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन करने को तैयार नहीं हैं.

उन्होंने कहा क‍ि वसंत ऋतु में मैंने हमारे यूरोपीय सहयोगियों से कहा था कि वे चीन और India पर सेकेंडरी टैरिफ लगाने में हमारा साथ दें, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया. उन्‍होंने कहा, “तो, फिर इसका पूरा बोझ केवल अमेरिका ही क्यों उठाए?”

बेसेंट ने आरोप लगाया कि यूरोपीय देश ऊर्जा खरीदकर अब भी रूस को आर्थिक फायदा पहुंचा रहे हैं. उन्होंने रूस की यामल ऊर्जा परियोजना का उदाहरण देते हुए कहा कि इस साल के पहले छह महीनों में वहां से 140 ऊर्जा खेप भेजी गईं, जिनमें से 136 यूरोपीय देशों को गईं.

उनके अनुसार, इन खेपों की कुल कीमत 8 अरब डॉलर से अधिक थी. इनमें बेल्जियम, स्पेन, फ्रांस और नीदरलैंड्स जैसे देश शामिल थे. वित्त मंत्री ने कहा कि जब सहयोगी देश समान कदम उठाने को तैयार नहीं हैं, तो अमेरिका को अपनी प्रतिबंध नीति की दोबारा समीक्षा करने का अधिकार है.

उन्होंने बताया कि कानून में 60 दिनों की अवधि दी गई है, जिसके दौरान स्थिति का आकलन किया जाएगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि रूस की बड़ी ऊर्जा कंपनियों पर पहले से लागू प्रतिबंध अभी भी जारी हैं.

बेसेंट ने कहा, “Friday को कोई भी प्रतिबंध नहीं हटाया गया. बिल्कुल कोई प्रतिबंध नहीं हटाया गया.” उन्होंने स्पष्ट किया कि नए प्रतिबंधों को स्थगित करना और रूसी डीजल निर्यात पर कुछ राहत देने का फैसला दो अलग-अलग बातें हैं.

सीएनएन के कार्यक्रम ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ में बोलते हुए ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने भी यही अंतर समझाया. उन्होंने कहा, “लिंडसे ग्राहम एक्ट रूस पर सीधे आर्थिक प्रतिबंध लगाने के बारे में नहीं है. यह उन देशों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने से जुड़ा है जो रूस के साथ व्यापार जारी रखे हुए हैं. ऐसे देशों में सबसे महत्वपूर्ण दो नाम India और चीन हैं.”

राइट ने बताया कि वॉशिंगटन यूक्रेन युद्ध और दीर्घकालिक व्यापारिक संबंधों को लेकर बीजिंग के साथ भी बातचीत कर रहा है. ट्रंप ने लिंडसे ग्राहम प्रतिबंधों को समाप्त नहीं किया है. उन्होंने केवल फिलहाल उनके लागू होने को रोक रखा है.

ऊर्जा मंत्री ने रूसी डीजल निर्यात को लेकर किए गए फैसले का भी बचाव किया. उनका कहना था कि रूस को इसका फायदा तभी मिलेगा जब वह अपने सैन्य अभियान कम करेगा और अधिक ईंधन निर्यात के लिए उपलब्ध होगा.

उन्होंने कहा कि रूसी कच्चे तेल पर मौजूदा प्रतिबंध अभी भी लागू हैं और डीजल से जुड़ा कदम युद्ध समाप्त करने की दिशा में प्रगति को प्रोत्साहित करने के लिए उठाया गया है.

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एवाई/एबीएम

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