अफगान मीडिया का बड़ा दावा, कंधार में फंसे भारतीय व्यापारी सूखे मेवे की खरीद और नए व्यापारिक रास्तों की तलाश में जुटे

New Delhi, 8 सितंबर . काबुल से मिली खबरों के अनुसार, जमीनी रास्तों के बंद होने, हवाई माल ढुलाई (एयर फ्रेट) के महंगे होने और सीमित वैकल्पिक रास्तों की वजह से अफगान निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ रही हैं, जिन्हें अपना सामान वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में संघर्ष करना पड़ रहा है.

टोलो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, आसानी से इंपोर्ट सुनिश्चित करने के लिए, सूखे मेवे खरीदने के लिए कंधार गए भारतीय व्यापारियों का एक समूह अब वैकल्पिक रास्तों से अफगान सूखे मेवे New Delhi एक्सपोर्ट करना चाहता है.

Sunday की रिपोर्ट में कहा गया है कि कंधार के किसानों ने बताया कि प्रांत की मशहूर सुनहरी किशमिश पहले India एक्सपोर्ट की जाती थी, लेकिन वह रास्ता अब बंद है.

‘गोल्डन’ किस्म, जिसे स्थानीय रूप से ‘अब्जोश’ किशमिश कहा जाता है, ‘आइटा’ नाम के अंगूर से बनाई जाती है.

सुनहरी किशमिश बनाने के लिए किसान अंगूरों को एक खास घोल में डुबोते हैं और फिर उन्हें सात दिनों तक तैयार जमीन पर फैलाकर रखते हैं.

कंधार के ज्यादातर ताजे और सूखे मेवे पड़ोसी, अरब और यूरोपीय देशों को एक्सपोर्ट किए जाते हैं, लेकिन हाल ही में एयर फ्रेट (हवाई माल ढुलाई) की लागत बढ़ने से सूखे मेवे के व्यापारियों में चिंता बढ़ गई है.

India के एक व्यापारी, आनंद, ने अफगान न्यूज वेबसाइट को बताया, “हम यहां तीन-चार दिनों से सूखे मेवे खरीद रहे हैं और फिर उन्हें दूसरे एशियाई देशों के जरिए New Delhi भेजते हैं. अफगानिस्तान के साथ हमारा व्यापार ऐसा ही है.”

Governmentी आंकड़ों से पहले ही पता चला था कि एक तरफ Pakistan सीमा का बंद होना और दूसरी तरफ पश्चिम एशिया में भू-Political संघर्ष अफगानिस्तान के वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर रहे हैं.

अलग-अलग रिपोर्टों में ऐसे आंकड़े दिए गए हैं जिनसे पता चलता है कि अफगान व्यापारियों ने वैकल्पिक रास्तों के तौर पर ईरान के चाबहार पोर्ट, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान से होकर जाने वाले रेल कॉरिडोर और India के लिए एयर फ्रेट लिंक का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है.

ये विकल्प मजबूती तो देते हैं, लेकिन इनकी लागत ज्यादा होती है और इनमें भू-Political जोखिम भी होते हैं.

India अफगानिस्तान के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक बना हुआ है; Pakistan द्वारा रास्ते बंद करने के बावजूद 2025-26 में दोनों देशों के बीच व्यापार 907.85 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया.

India मुख्य रूप से सूखे मेवे, केसर और मसाले इंपोर्ट करता है, जबकि दवाएं, मशीनरी और खाद्य उत्पाद एक्सपोर्ट करता है, लेकिन अब पश्चिम एशिया में युद्ध और एयर फ्रेट की बढ़ती लागत ने व्यापारियों को और ज्यादा प्रभावित किया है.

पिछले साल Pakistan-अफगानिस्तान संघर्ष के हिंसक होने और डूरंड लाइन पर व्यापारिक रास्ते बंद होने से पहले ही, इस्लामाबाद ने India से अफ़ग़ानिस्तान आने वाले सामान के लिए रुकावटें पैदा कर दी थीं. इस तरह, Pakistan की रुकावटों के बावजूद चाबहार पोर्ट और एयर कॉरिडोर के जरिए ही व्यापार जारी रह सका. Pakistan कस्टम्स के डेटा का हवाला देते हुए रिपोर्ट्स में कहा गया है कि काबुल की पिछली Governmentों के साथ इस्लामाबाद के तनावपूर्ण रिश्तों के बावजूद, कंटेनर ट्रैफिक 2016-2017 में लगभग 60,500 कंटेनर से बढ़कर 2020-2021 में लगभग 89,000 कंटेनर हो गया था; यह तालिबान के सत्ता में लौटने से ठीक पहले की बात है.

तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद, Pakistan के रास्ते होने वाले ट्रांजिट कार्गो में शुरू में सुधार हुआ और 2022-2023 में कंटेनर ट्रैफिक 102,886 तक पहुंच गया, जिसकी कीमत 6.7 अरब डॉलर थी. हालांकि, रिपोर्ट्स में आगे कहा गया है कि यह पीक (उच्चतम स्तर) था, जिसके बाद 2024-2025 में यह संख्या घटकर 42,959 कंटेनर रह गई, जिनकी कीमत 1.36 अरब डॉलर थी.

अक्टूबर 2025 में, एक तीखी झड़प के बाद अफगानिस्तान-Pakistan सीमा बंद कर दी गई थी.

कस्टम्स के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में यह संख्या घटकर सिर्फ़ 11,592 कंटेनर रह गई, जिनकी कीमत 367 मिलियन डॉलर थी.

इन रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि Pakistan के रास्ते India और अन्य देशों को होने वाला अफगानिस्तान का निर्यात 2024-2025 में 454 मिलियन डॉलर से घटकर 2025-2026 में 7 मिलियन डॉलर रह गया.

एससीएच/डीएससी

Leave a Comment