अफगान तालिबान के खिलाफ अपनी पुरानी ‘प्रॉक्सी रणनीति’ अपना रहा पाकिस्तान, उल्टा पड़ सकता है दांव: रिपोर्ट

New Delhi, 25 अक्टूबर . Pakistan का सैन्य प्रतिष्ठान अपने पुराने सहयोगी अफगान तालिबान के खिलाफ दशकों पुरानी रणनीति को दोहराता नजर आ रहा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, Pakistan कथित तौर पर अफगान गुटों को भर्ती कर उन्हें हथियार मुहैया करा रहा है, ताकि इस्लामाबाद के विरोधी विद्रोही समूहों से मुकाबला किया जा सके. हालांकि, Pakistan की यह रणनीति उसके लिए उलटी भी पड़ सकती है.
साउथ एशिया प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान में अमेरिका के पूर्व विशेष दूत जलमय खलीलजाद ने इस घटनाक्रम को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने सामने आ रही उन खबरों का हवाला दिया, जिनमें कहा गया है कि Pakistanी सेना ने इस्लामाबाद के विरोधी आतंकवादी समूहों से मुकाबला करने के लिए अफगानों को हथियार देना शुरू कर दिया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, खलीलजाद ने चेतावनी दी, ”मौजूदा परिस्थितियों में अफगानिस्तान और Pakistan के बीच संबंध और भी खराब होने की आशंका है.” हालांकि, Pakistan के सूचना मंत्रालय ने इन आरोपों को ‘निराधार और भ्रामक’ बताते हुए खारिज कर दिया है. इसके बावजूद विश्लेषकों का मानना है कि कथित कदम Pakistan के सुरक्षा प्रतिष्ठान की लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक सोच को दर्शाता है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्लामाबाद करीब चार दशकों तक अफगान तालिबान को एक रणनीतिक संपत्ति के रूप में देखता रहा. Pakistan का उद्देश्य India को अफगानिस्तान में प्रभाव बढ़ाने से रोकना और काबुल में अपने अनुकूल Government सुनिश्चित करना था. लेकिन अब दोनों के संबंधों में खटास आ गई है और तहरीक-ए-तालिबान Pakistan (टीटीपी) को लेकर सीमा पर कम तीव्रता वाला संघर्ष जारी है.
Pakistan आरोप लगाता रहा है कि अफगान तालिबान अपने क्षेत्र में टीटीपी को पनाह दे रहा है. वहीं, काबुल पर टीटीपी के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बनाने के बावजूद इस्लामाबाद को अपेक्षित नतीजे नहीं मिले हैं. रिपोर्ट में कहा गया है, ”काबुल के अपने वैचारिक सहयोगियों पर लगाम लगाने से इनकार करने से निराश इस्लामाबाद अपनी ऐतिहासिक रणनीति पर लौटता दिखाई दे रहा है. यानी आग से आग बुझाना या दूसरे शब्दों में कहें तो प्रॉक्सी के मुकाबले प्रॉक्सी का इस्तेमाल करना.”
हालांकि, रिपोर्ट ने इस रणनीति को जोखिम भरा बताया है. Pakistan का अतीत गवाह रहा है कि विदेशों में अपने हितों के लिए आतंकवादी संगठनों का इस्तेमाल करने की उसकी नीति कई बार उसी के खिलाफ पड़ गई. जिन समूहों को दूसरे देशों में लड़ने के लिए हथियार और समर्थन दिया गया, बाद में उन्होंने Pakistan को ही निशाना बनाया.
रिपोर्ट के अनुसार, टीटीपी को दबाने के लिए नए अफगान गुटों को कथित तौर पर हथियार मुहैया कराने से Pakistan के सामने अनियंत्रित स्थानीय मिलिशिया के उभरने का खतरा पैदा हो सकता है. इससे पहले से अस्थिर सीमा क्षेत्र में हिंसा और बढ़ने की आशंका है. रिपोर्ट में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कुर्रम जिले में हाल ही में Pakistanी बलों और अफगान तालिबान के जवानों के बीच भारी तोपखाने से हुई गोलीबारी का भी उल्लेख किया गया है. Pakistanी अधिकारियों ने दावा किया था कि इस दौरान तालिबान की सीमा चौकियों को नष्ट कर दिया गया.
रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन गुटों को Pakistan ने अपनी पश्चिमी सीमा को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से समर्थन दिया था, वे अब उसकी सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल हो गए हैं. यदि नए अफगान गुटों को हथियार देने संबंधी खबरों की पुष्टि होती है, तो यह परमाणु हथियार संपन्न Pakistan की ओर से उठाया गया एक जोखिम भरा कदम होगा. रिपोर्ट ने चेतावनी दी कि अतीत में पैदा किए गए खतरों पर काबू पाने की कोशिश में Pakistan भविष्य के लिए नए विरोधियों को तैयार कर सकता है.
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डीएससी


