‘जिंदा’ ने सिद्धार्थ महादेवन को रातों-रात बना दिया स्टार, मेहनत से बनाई अलग पहचान

Mumbai , 15 अप्रैल . फिल्मी दुनिया में कई कलाकार ऐसे होते हैं, जो अपने परिवार की पहचान के साथ आगे तो बढ़ते हैं, लेकिन अपनी मेहनत और हुनर से अपनी जगह बनाते हैं. ऐसे ही एक नाम हैं सिद्धार्थ महादेवन, जिन्होंने अपनी दमदार आवाज के दम पर संगीत की दुनिया में खास पहचान बनाई.

भले ही वह मशहूर गायक शंकर महादेवन के बेटे हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा अपनी अलग राह बनाने की कोशिश की. खासतौर पर फिल्म ‘भाग मिल्खा भाग’ का गाना ‘जिंदा’ उनके करियर का ऐसा मोड़ बना, जिसने उन्हें हर घर में पहचान दिला दी. यह गाना आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय है.

16 अप्रैल 1993 को जन्मे सिद्धार्थ महादेवन ने बचपन से ही अपने घर में बड़े-बड़े कलाकारों को गाते और संगीत पर चर्चा करते देखा. उनके पिता शंकर महादेवन खुद एक बड़े गायक और संगीतकार हैं. ऐसे में सिद्धार्थ को संगीत सीखने का मौका जल्दी मिल गया. उन्होंने बचपन से ही कर्नाटक और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत सीखा और धीरे-धीरे अपनी आवाज को निखारते गए.

अपने करियर की शुरुआत में सिद्धार्थ ने छोटे-छोटे प्रोजेक्ट्स में काम शुरू किया. वह स्टूडियो में अपने पिता के साथ समय बिताते थे और वहां से बहुत कुछ सीखते थे. उन्होंने अलग-अलग तरह की संगीत को समझा, जैसे गजल, पॉप, रॉक और अन्य शैलियां. उनके पिता हमेशा कहते थे कि किसी की नकल मत करो, बल्कि अपनी अलग पहचान बनाओ. यही सीख उनके काम में नजर आई.

साल 2013 में आई फिल्म ‘भाग मिल्खा भाग’ उनके लिए एक बड़ा मौका लेकर आई. इस फिल्म में उन्होंने ‘जिंदा’ गाना गाया, जिसने उन्हें अचानक ही चर्चा में ला दिया. इस गाने में उनकी ऊर्जा भरी आवाज ने लोगों के दिलों को छू लिया. इसी फिल्म का ‘भाग मिल्खा भाग’ गाना भी उन्होंने गाया. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.

इसके बाद सिद्धार्थ ने फिल्म ‘धूम 3’ में ‘मलंग’ जैसे हिट गाने गाए, जिसने उन्हें और भी लोकप्रिय बना दिया. उन्होंने ‘बार बार देखो’ का ‘नचदे ने सारे’ गाना भी गाया.

सिद्धार्थ ने सिर्फ गाने ही नहीं गाए, बल्कि संगीत भी तैयार किया है. उन्होंने मराठी फिल्मों के लिए संगीत बनाया और बतौर संगीतकार भी अपनी पहचान बनाई.

पुरस्कारों की बात करें तो ‘जिंदा’ गाने के लिए उन्हें कई बड़े अवॉर्ड्स में नामांकन मिला. उन्हें नए संगीत प्रतिभा के लिए आर.डी. बर्मन अवॉर्ड भी मिला.

पीके/एबीएम

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