
टोक्यो, 15 अगस्त . द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के आत्मसमर्पण के 81वें साल पर Saturday को टोक्यो का विवादित यासुकुनी श्राइन एक बार फिर जापान की राजनीति और कूटनीति के केंद्र में आ गया. Prime Minister सानाए ताकाइची ने खुद स्थल पर जाने से परहेज करते हुए वहां धार्मिक भेंट भेजी, जबकि रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी और एक अन्य कैबिनेट मंत्री ने व्यक्तिगत रूप से यासुकुनी का दौरा किया.
योनहाप के अनुसार, ताकाइची ने यह भेंट Prime Minister के तौर पर नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) की अध्यक्ष के रूप में भेजी. रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने इसकी राशि अपनी निजी धनराशि से दी. Prime Minister बनने से पहले ताकाइची 15 अगस्त को नियमित रूप से यासुकुनी श्राइन जाती रही थीं, लेकिन अक्टूबर 2025 में Prime Minister बनने के बाद उन्होंने व्यक्तिगत दौरे से दूरी बनाए रखी है.
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यासुकुनी श्राइन जापान के युद्ध में मारे गए करीब 25 लाख लोगों को समर्पित है. इसे लेकर विवाद इसलिए है क्योंकि यहां द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान युद्ध अपराधों के दोषी ठहराए गए 14 क्लास-ए युद्ध अपराधियों को भी सम्मानित किया जाता है. इनमें तत्कालीन Prime Minister हिदेकी तोजो भी शामिल थे. चीन और दक्षिण कोरिया यासुकुनी में जापानी नेताओं की यात्राओं को जापान के सैन्यवादी अतीत को महिमामंडित करने के प्रयास के तौर पर देखते हैं.
ताकाइची का इस बार श्राइन न जाना ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब जापान के चीन के साथ संबंध पहले से तनावपूर्ण हैं और दक्षिण कोरिया के साथ संबंधों को सुधारने की कोशिश चल रही है. Prime Minister के रूप में यासुकुनी की यात्रा चीन और दक्षिण कोरिया की तीखी प्रतिक्रिया को आमंत्रित कर सकती थी.
हालांकि, ताकाइची के मंत्रिमंडल के कुछ सदस्यों ने इससे अलग रुख अपनाया. रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी Saturday सुबह यासुकुनी पहुंचे. वह 15 अगस्त को वहां जाने वाले 2024 के बाद पहले मौजूदा रक्षा मंत्री बने हैं. Prime Minister ताकाइची के मंत्रिमंडल में उत्तरी क्षेत्र और ओकिनावा मामलों के प्रभारी मंत्री हितोशी किकावादा ने भी श्राइन का दौरा किया.
सत्तारूढ़ एलडीपी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने भी सामूहिक रूप से यासुकुनी पहुंचकर श्रद्धांजलि दी. इनमें पार्टी महासचिव शुनिची सुजुकी समेत वरिष्ठ नेता शामिल थे.
यासुकुनी विवाद का इतिहास जापान के पड़ोसी देशों के साथ उसके संबंधों से गहराई से जुड़ा है. जापान ने 1910 से 1945 तक कोरियाई प्रायद्वीप पर औपनिवेशिक शासन किया था और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान चीन के बड़े हिस्से पर कब्जा किया था इसलिए दक्षिण कोरिया और चीन में यासुकुनी को जापान के युद्धकालीन अतीत की याद और उसके प्रति पर्याप्त ऐतिहासिक प्रायश्चित न करने के प्रतीक के रूप में देखा जाता है.
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केआर/